10.6 करोड़ रु की साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश; अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े छह लोग गिरफ्तार

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10.6 करोड़ रु की साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश; अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े छह लोग गिरफ्तार

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 10:40 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 10:40 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) दिल्ली पुलिस ने कई अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़े छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’, फर्जी आईपीओ और ट्रेडिंग धोखाधड़ियों में शामिल थे। इस दौरान 89 शिकायतों से संबंधित लगभग 10.6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर छापेमारी के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों का संबंध साइबर ठगी कम से कम चार मामलों से है, जिनमें मुख्य रूप से बुजुर्गों सहित भोले-भाले नागरिकों को निशाना बनाया गया था।

‘डिजिटल अरेस्ट’ से संबंधित एक मामले में, एक बुजुर्ग दंपति को कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने ट्राई और सीबीआई अधिकारी बनकर 20 लाख रुपये का चूना लगाया।

जांच के दौरान पता चला कि इस ठगी से संबंधित 18.5 लाख रुपये शशिकांत कुमार नामक शख्स के एक उद्यम से जुड़े बैंक खाते में डाले गए थे। उसे रांची से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि अदालत के आदेशों के माध्यम से शिकायतकर्ता को लगभग 11 लाख रुपये वापस कर दिए गए हैं।

एक अन्य मामले में, फर्जी आईपीओ निवेश योजना के तहत, एक शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप ग्रुप और धोखाधड़ी वाले मोबाइल ऐप्लिकेशन के माध्यम से 7.79 लाख रुपये का चूना लगाया गया, जिसमें उच्च रिटर्न का वादा किया गया था।

जांच के बाद उत्तराखंड के रुड़की से खालिद त्यागी को गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित तौर पर धन के लेन-देन के लिए ‘म्यूल’ खातों (दूसरों के नाम पर खोले गए खातों) का इंतजाम किया था। उससे जुड़े खाते का संबंध लगभग 4.08 करोड़ रुपये से संबंधित 25 शिकायतों से पाया गया।

पुलिस ने बताया कि एक अन्य मामले में आरोपी सचिन मित्तल को दिल्ली के शाहदरा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया गया खाता 24 शिकायतों से जुड़ा हुआ है जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी से हासिल रकम शामिल है।

सिम के कथित दुरुपयोग से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ के एक अन्य मामले में, पीड़ित को धमकाया गया और उससे आठ लाख रुपये हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।

पुलिस ने बताया कि त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप भोपाल स्थित एक खाते से पूरी राशि बरामद कर ली गई। इस संबंध में तीन आरोपियों – आसिफ, नितिन सैनी और वीरेंद्र मुखिया को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया, वीडियो कॉल और जाली दस्तावेजों के जरिए डर पैदा किया और पीड़ितों को ‘सत्यापन’ या निवेश के उद्देश्य से पैसे स्थानांतरित करने के लिए फुसलाया। इसके बाद, पकड़े जाने से बचने के लिए धनराशि को कई ‘मूल्य’ खातों में भेजा गया।

अब तक लगभग 19 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं और अदालती आदेशों के माध्यम से पीड़ितों को लौटाए जा चुके हैं। आरोपियों से मोबाइल फोन, चेक बुक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की गई है।

भाषा नोमान

नोमान सुरेश

सुरेश