बीरभूम में 20 करोड़ रुपये और 15 किलो सोना जब्त, पार्थ चटर्जी मामले के बाद सबसे बड़ी बरामदगी

बीरभूम में 20 करोड़ रुपये और 15 किलो सोना जब्त, पार्थ चटर्जी मामले के बाद सबसे बड़ी बरामदगी

बीरभूम में 20 करोड़ रुपये और 15 किलो सोना जब्त, पार्थ चटर्जी मामले के बाद सबसे बड़ी बरामदगी
Modified Date: July 29, 2026 / 06:45 pm IST
Published Date: July 29, 2026 6:45 pm IST

कोलकाता, 29 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल पुलिस ने बुधवार को बीरभूम जिले में कम से कम 20 करोड़ रुपये नकद और 15 किलोग्राम सोना जब्त किया।

राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी के ठिकानों से चार साल पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त की गई रकम के बाद यह अवैध रूप से जमा की गई नकदी और सोने की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है।

पुलिस ने बताया कि सरकारी बस ड्राइवर से पत्थर व्यापारी बने मीनार मंडल के देवचा गांव स्थित दो मंजिला मकान से एक-एक किलोग्राम वजनी सोने की 14 छड़ और 100-100 ग्राम के सोने के 10 बिस्कुट बरामद किए गए हैं, जिनकी वर्तमान बाजार दर के अनुसार कीमत लगभग 21.5 करोड़ रुपये है।

अधिकारियों ने बताया कि कई थैलों में भरकर रखी गई नकदी की गिनती इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक जारी थी और यह आंकड़ा पहले ही 20 करोड़ रुपये को पार कर चुका था।

पुलिस ने मीनार मंडल की पहचान फरार कारोबारी टुल्लू मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन के संबंधी के रूप में की है।

टुल्लू मंडल का बीरभूम के पत्थर खनन व्यवसाय में बड़ा कारोबार है और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उसे ‘‘बालू माफिया’’ संचालक बताया है।

यह बरामदगी बीरभूम में कथित अवैध खनन और राजस्व चोरी के खिलाफ जारी एक बड़ी कार्रवाई के बीच हुई है।

बीरभूम जिला लंबे समय से पत्थर व्यापार से जुड़े अवैध खनन और संगठित अपराध के आरोपों के कारण जांच के दायरे में रहा है।

इससे पहले जुलाई 2022 में, राज्य के स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से कुल 50 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी, सोना और विदेशी मुद्रा बरामद की गई थी।

टुल्लू का नाम करोड़ों रुपये के मवेशी तस्करी मामले में सीबीआई जांच में सामने आया था। अगस्त 2022 में, एजेंसी ने जिले के मोहम्मद बाजार इलाके में उसके कार्यालय और गोदाम के अलावा उसकी कई संपत्तियों की तलाशी ली थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में उसी वर्ष नवंबर में उसे पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया था।

ईडी का समन मिलने के 48 घंटों के भीतर, टुल्लू को बीरभूम पुलिस ने अक्टूबर 2022 में दर्ज हत्या के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया था। एक पुलिस सूत्र ने दावा किया कि जमानत मिलने के बाद, वह इस साल मई में राज्य चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद से छिप गया था।

पुलिस ने बताया कि टुल्लू बीरभूम के पत्थर कारोबार का एक बड़ा हिस्सा संभालता था और कथित तौर पर बीरभूम तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख अनुब्रत मंडल का करीबी सहयोगी था।

अनुब्रत मंडल को सीबीआई ने मवेशी तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था और जमानत मिलने के बाद वे पार्टी के भीतर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए हैं।

पुलिस ने कहा कि तलाशी अभियान के दौरान मीनार और उसके बेटे को घर पर ही हिरासत में ले लिया गया और उनसे उन संभावित अतिरिक्त ठिकानों के बारे में पूछताछ की जा रही थी, जहां नकदी छिपाई जा सकती थी।

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘‘मीनार मंडल इलाके के उन सात टोल गेटों में से एक का प्रभारी था, जहां से पत्थर खदानों के ट्रक गुजरते थे, और वह ट्रांसपोर्टर से राजस्व वसूला करता था। आशंका है कि उसने सरकारी खजाने में जाने वाली भारी नकदी की धोखाधड़ी की है, और यह उस संपत्ति का एक हिस्सा है, जिसे पुलिस ने अब बरामद किया है।’’

पुलिस के मुताबिक, मीनार पहले नॉर्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में ड्राइवर के पद पर कार्यरत था। कुछ साल पहले वह नौकरी छोड़कर अपने रिश्तेदार के पत्थर के कारोबार में शामिल हो गया था।

इससे पहले, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल के शासनकाल में बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी और अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए बीरभूम के आधिकारिक आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद कार्रवाई होने से राजस्व संग्रह में भारी बढ़ोतरी हुई है।

शुभेंदु ने कहा कि पिछली सरकार के तहत पत्थर खदानों से मासिक संग्रह लगभग 35-40 लाख रुपये था, जबकि वर्तमान सरकार ने मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच 83 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अकेले खनन क्षेत्र से कथित राजस्व चोरी सालाना लगभग 1,200 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक खनन क्षेत्र से हुए इस नुकसान ने राज्य में ‘‘आर्थिक आपदा’’ पैदा कर दी थी।

इस पृष्ठभूमि में, शुभेंदु ने कहा कि राजस्व संग्रह में रत्ती भर भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त सतर्कता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जनता के पैसे का एक भी रुपया इधर-उधर न हो सके।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बालू माफिया पर इस कार्रवाई के लिए हमारे कानून प्रवर्तन कर्मियों द्वारा किया गया काम सराहनीय है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध रूप से जमा की गई संपत्ति बरामद हुई है।

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और संगठित अपराध के खिलाफ अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘‘भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति’’ के साथ अपना अभियान जारी रखेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से साफ होना चाहिए कि दागदार अतीत वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, जिसने सार्वजनिक संसाधनों के दोहन और तत्कालीन सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के साथ सांठगांठ करके संपत्ति बनाई है।’’

शुभेंदु ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक संसाधनों को लूटने में शामिल लोगों को कानून के कड़े कदम का सामना करना पड़ेगा और माफिया सिंडिकेट पर कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने इस अभियान की सफलता के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), बीरभूम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला पुलिसकर्मियों की भी सराहना की।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, ममता बनर्जी खेमे के तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि जहां ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, वहीं सरकार को उन राजनीतिक नेताओं की भी जांच करनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों को संरक्षण दिया था।

उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा, ‘‘मैं सुन रहा हूं कि ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोग उन नेताओं से गहराई से जुड़े हुए थे जो अब खुद को ‘अच्छी तृणमूल’ बताते हैं। मैं सरकार से आग्रह करूंगा कि वह इसकी गहराई से जांच करे और उन लोगों की पहचान करे, जिन्होंने ऐसे अपराधियों को संरक्षण दिया तथा उनकी अवैध कमाई से फायदा उठाया।’’

भाषा सुरेश नेत्रपाल

नेत्रपाल


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