कन्नूर (केरल), 13 जुलाई (भाषा) कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सोमवार को कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े धन के कथित गबन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दुख जताना ऐसा है, जैसे कोई चोर चोरी करने के बाद पछतावा व्यक्त करे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाएगी।
वेणुगोपाल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित धन गबन का मामला इस समय देश का सबसे बड़ा मुद्दा है और इस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का केवल खेद व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि कोई चोर चोरी करने के बाद पछतावा जताए तो क्या मामला वहीं खत्म हो जाता है। यदि मंदिर की धन-संपदा को लूटने वाले ही यह कहें कि उन्हें इसका पछतावा है, तो क्या इससे पूरा मामला समाप्त हो जाएगा । क्या यह आस्था पर सीधा हमला नहीं है।’’
कर्नाटक के बेलगावी में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में संघ ने कथित अनियमितताओं पर ‘दुख’ व्यक्त किया था और विश्वास जताया था कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच तथा पुलिस की कार्रवाई जल्द ही किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगी।
वेणुगोपाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह बयान उन्हें हैरान करने वाला लगा।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कर्नाटक में आयोजित अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा है कि उसे जो कुछ हुआ, उसका दुख है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद का एक प्रमुख नेता आरोपी है। इस प्रकरण में कार्रवाई करने वाला न्यास केंद्र सरकार ने गठित किया था। इसका गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रत्यक्ष निगरानी में किया गया था।”
उन्होंने कहा कि अयोध्या का दशकों तक राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार मंदिरों का उपयोग आर्थिक लाभ और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कई दशकों से अयोध्या के नाम पर किस तरह का प्रचार किया गया। हम सभी आस्थावान लोग हैं। उन्होंने उसी आस्था पर प्रहार किया है। न केवल अयोध्या में, बल्कि बदरीनाथ और केदारनाथ में भी ऐसा हुआ है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार हिंदू समाज के सबसे पवित्र मंदिरों का इस्तेमाल केवल उनकी संपत्ति लूटने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उनके लिए आस्था केवल मंदिरों की संपत्ति लूटने या धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का एक माध्यम है। वे ईश्वर के प्रति श्रद्धा से प्रेरित होकर काम नहीं करते। वे धर्म का उपयोग या तो मंदिरों की संपत्ति लूटने के लिए करते हैं या गरीब लोगों को हिंदू, मुसलमान और ईसाई के नाम पर बांटने के लिए करते हैं। अब यह बात सामने आ गई है।”
उन्होंने दावा किया कि गरीब श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के कारण मंदिर के लिए धन का योगदान दिया था, लेकिन उस धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने कहा, “यह आस्था पर सीधा हमला है। आज देश के सामने यही सबसे बड़ा मुद्दा है।”
एक सवाल के जवाब में वेणुगोपाल ने इस मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा, “इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए। अयोध्या मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद हुआ था। मंदिर का न्यास प्रधानमंत्री की देखरेख में गठित किया गया था। इसलिए सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।”
वेणुगोपाल ने कहा कि संसद का सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और कांग्रेस इस मामले में सरकार से जवाब मांगेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अयोध्या के मुद्दे पर हम संसद के भीतर जोरदार संघर्ष करेंगे।”
शबरिमला मामले से जुड़े एक प्रश्न पर वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने आस्था से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया है।
वेणुगोपाल ने कहा, “उन्होंने शबरिमला के मुद्दे को भी नहीं उठाया। वह भी एक राजनीतिक खेल था। उनके लिए आस्था के केवल दो उद्देश्य हैं—या तो लूट करना या लोगों को बांटना। इसके अलावा उनकी कोई मंशा नहीं है।”
कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग तथा दबाव और धमकी के जरिए विपक्षी दलों में टूट कराने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘देखिए, विपक्षी दलों के साथ क्या हुआ। जो नेता पहले भारतीय जनता पार्टी की कड़ी आलोचना करते थे, वे अचानक उसके सहयोगी बन गए। यह सब धमकी और दबाव के जरिए हुआ। ऐसा तृणमूल कांग्रेस में हुआ, शिवसेना में हुआ और आम आदमी पार्टी में भी हुआ।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर सत्ता में बने रहना है।
उन्होंने कहा, ‘‘उनका मकसद परिसीमन लागू करना, निर्वाचन आयोग का दुरुपयोग करना और देश पर शासन करते रहना है। भारत की जनता लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देगी।”
वेणुगोपाल ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के भविष्य को खतरे में डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा, “जिस मंत्री के कार्यकाल में परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ, वह अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। वहीं, एक दूसरे केंद्रीय मंत्री के पूरे कार्यालय के कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया है। कहा जा रहा है कि यह देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए? क्या इस पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए?”
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़े प्रश्न पर वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी के पास ऐसे मामलों के निपटारे के लिए अपनी संगठनात्मक व्यवस्था है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
अडाणी समूह द्वारा विझिंजम बंदरगाह में अपनी हिस्सेदारी हस्तांतरित करने के प्रस्ताव से जुड़े सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पहले ही सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केंद्र सरकार ऐसा कोई निर्णय न ले, जो केरल के हितों के विरुद्ध हो। यही इस मुद्दे पर हमारा जवाब है।”
भाषा रंजन दिलीप
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