आरएसएस ने भारत की राष्ट्रीय चेतना को जगाने में उल्लेखनीय क्षमता प्रदर्शित की: ऑर्गनाइजर

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आरएसएस ने भारत की राष्ट्रीय चेतना को जगाने में उल्लेखनीय क्षमता प्रदर्शित की: ऑर्गनाइजर

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 05:34 PM IST,
    Updated On - April 4, 2026 / 05:34 PM IST

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ ने अपने नवीनतम संपादकीय में कहा है कि कुछ वर्गों द्वारा पहचान आधारित विभाजनों के जरिए समाज में खाई पैदा करने के प्रयासों के बावजूद संघ ने भारत की राष्ट्रीय चेतना को जागृत और विस्तारित करने की ‘‘अद्भुत क्षमता’’ दिखाई है।

संपादकीय के अनुसार, यह प्रक्रिया विजयादशमी उत्सव से शुरू हुई, जिसके तहत अक्टूबर 2025 से सक्रिय स्वयंसेवकों को व्यापक रूप से एकजुट किया गया। 15 दिनों में 62,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 32 लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

इसके अलावा, 22,000 स्थानों पर ‘‘पथ संचलन’’ आयोजित हुए, जिनमें 25 लाख से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए।

पत्रिका ने अपने संपादकीय में कहा, ‘‘पहले चरण में जागृत लोगों के एक महत्वपूर्ण समूह को संगठित किया गया, जो अभियान को दूसरे चरण तक ले जा सके।’’

इसमें कहा गया है कि संघ के ‘‘गृह संपर्क अभियान’’ के जरिए अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुंच बनाई गई है, जो 46 में से 37 प्रांतों को कवर करता है।

संपादकीय में कहा गया कि इस अभियान के माध्यम से सक्रिय स्वयंसेवकों और संघ के कार्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों तक पहुंच बनाई गई। इस प्रक्रिया ने राष्ट्र की ‘‘सुप्त शक्ति’’ को जागृत किया और स्वयंसेवकों को समाज के आम सवालों चाहे वे समर्थक हों या आलोचक, को समझने का अवसर मिला।

पत्रिका के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने लिखा, ‘‘जब पहचान आधारित विभाजन के माध्यम से समाज में खाई पैदा करने के प्रयास एक अस्थिर वैश्विक परिदृश्य के साथ मेल खाते हैं, तब संघ ने भारत की राष्ट्रीय चेतना को जगाने और विस्तारित करने की उल्लेखनीय क्षमता प्रदर्शित की है।’’

संपादकीय के अनुसार, देशभर में आयोजित हिंदू सम्मेलनों में जाति, पंथ, धर्म या राजनीतिक संबद्धता से परे तीन करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया। ये कार्यक्रम स्थानीय समितियों द्वारा आयोजित किए गए, जिनमें 20 से 40 तक प्रमुख लोग और संगठन शामिल थे।

इसके अलावा ‘‘सद्भाव बैठक’’ और ‘‘प्रमुख जन संगोष्ठी’’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और समाज के बौद्धिक व सामाजिक नेतृत्व को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। इन बैठकों में प्रश्नोत्तर सत्र के जरिए संघ के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की गई।

संपादकीय में कहा गया है, ‘‘जागृति शक्ति, सुप्त शक्ति और सज्जन शक्ति राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। संघ ने इन अवसरों का उपयोग बिना उत्सवधर्मी रवैया अपनाए, समाज के उन वर्गों तक पहुंचने के लिए किया, जहां अभी तक पहुंच नहीं बन पाई थी।

संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की बैठक हरियाणा के समालखा में हुई, जिसमें 2025-26 के कार्यों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय की गई।

पंद्रह मार्च को समाप्त हुई इस तीन दिवसीय बैठक में संगठनात्मक विस्तार, राष्ट्रीय हित में ‘‘सकारात्मक ताकतों’’ की भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।

बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, महासचिव दत्तात्रेय होसबाले सहित संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा संघ से जुड़े 32 संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया, जिनमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी शामिल है।

भाषा गोला माधव

माधव