जयपुर, पांच मार्च (भाषा) राजस्थान में सरकारी भवनों की शिलापट्टिकाओं पर जन प्रतिनिधियों का ही नाम लिखे जाने का नियम है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इसका उल्लंघन होने पर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि केकड़ी जिला अस्पताल में मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई का काम लगभग पूरा हो गया है तथा यह उद्घाटन के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में इस इकाई के भवन निर्माण का काम पूरा हुए बिना ही उद्घाटन किये जाने तथा शिलापट्टिका पर नियमविरुद्ध नाम लिखे जाने की जांच कराई जाएगी।
इसके साथ ही राज्य में अन्य चिकित्सा संस्थानों के भवनों पर भी नियम विरुद्ध लगाए गए शिलालेखों को हटाया जाएगा।
विधायक शत्रुघ्न गौतम के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि नियमानुसार सरकारी भवनों की शिलापट्टिकाओं पर चुने गए सांसद से लेकर सरपंच जैसे जन प्रतिनिधियों का ही नाम होना चाहिये।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इसका उल्लंघन होने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा 30 सितंबर, 2023 को आचार संहिता लगने से मात्र तीन दिन पहले आनन फानन में केकड़ी जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई के अधूरे बने भवन का उद्घाटन कर दिया गया।
साथ ही नाम पट्टिका पर भी चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अतिरिक्त अन्य नाम अंकित कर दिये गए।
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि उद्घाटन के लिए विभाग द्वारा अनुमति भी नहीं ली गई थी।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस संबंध में व्यवस्था देते हुए कहा कि सभी सरकारी भवनों के उद्घाटन के समय शिलालेखों पर चुने गए जनप्रतिनिधियों का ही नाम लिखा जाना चाहिये, चाहे वह किसी भी पार्टी से संबंधित हों।
भाषा पृथ्वी मनीषा संतोष
संतोष