पंजाब में अगली सरकार शिअद बनाएगी : बादल

Ads

पंजाब में अगली सरकार शिअद बनाएगी : बादल

  •  
  • Publish Date - March 29, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 09:15 PM IST

डेरा बस्सी (पंजाब, 29 मार्च (भाषा) शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी पंजाब में अगली सरकार बनाएगी और मोहाली-जिरकपुर-डेरा बस्सी-न्यू चंडीगढ़-खरार क्षेत्र को मुंबई तथा गुरुग्राम की तरह एक आर्थिक केंद्र के रूप में बदल देगी।

बादल ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम इस क्षेत्र में पर्यटन परियोजनाओं को लाने और डेरा बस्सी में एक औद्योगिक केंद्र स्थापित करने के अलावा एक आईटी केंद्र भी स्थापित करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सड़क अवसंरचना के उन्नयन और विश्व स्तरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के अलावा, पूरे क्षेत्र को मेट्रो रेल प्रणाली से जोड़ा जाएगा।’’

उन्होंने विस्तार से यह भी बताया कि पिछली शिअद सरकार ने किस तरह एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना करके मोहाली को ‘‘विश्व मानचित्र पर स्थापित किया था और पार्टी 2027 के बाद (अगर शिअद सत्ता में आती है) इसे अगले स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

पार्टी के एक बयान के अनुसार, बादल ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने पहले स्थानीय निकाय चुनावों में एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए गठबंधन किया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव संयुक्त रूप से लड़ेंगे।

बादल ने आरोप लगाया कि ये दोनों पार्टियां पंजाब को दशकों पीछे ले जाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि लोग दिल्ली स्थित इन दोनों पार्टियों को नकार देंगे और अपने क्षेत्रीय दल – शिअद – को वोट देकर समर्थन देंगे।’’

बादल ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 2027 चुनाव में आम आदमी पार्टी के अलावा किसी और के सत्ता में आते ही भगवंत मान की कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दिए जाने की बात झूठ कही।

शिअद ने कहा, ‘‘सभी जानते हैं कि पंजाब में वर्तमान में जारी सभी कल्याणकारी योजनाएं शिअद द्वारा शुरू की गई थीं। वास्तव में आम आदमी पार्टी ने वृद्धावस्था पेंशन, आटा-दाल, शगुन और अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों को या तो समाप्त कर दिया है या उनमें भारी कटौती की है।’’

भाषा यासिर नरेश

नरेश