नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से एक ऐसी प्रायोगिक परियोजना लागू करने के अपने निर्देश पर अमल करने को कहा, जिसके तहत पेट्रोल पंप पर उन वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाए, जिनके पास वैध बीमा नहीं है।
शीर्ष अदालत ने चार अगस्त को सुनाए गए एक अहम फैसले में बड़ी संख्या में वाहनों के थर्ड-पार्टी बीमा के बिना सड़कों पर चलने पर गंभीर चिंता जताई थी और केंद्र सरकार को ऐसी प्रायोजिक परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया था, जिसके तहत वैध बीमा नहीं होने पर पेट्रोल पंप पर ऐसे वाहनों को ईंधन देने से इनकार किया जा सके।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की। इस दौरान केंद्र की ओर से पेश वकील ने प्रायोगिक परियोजना तैयार करने के न्यायालय के निर्देश का जिक्र करते हुए कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस संबंध में कुछ चिंताएं हैं।
पीठ ने कहा, “आपको इसे लागू करना होगा।” उसने कहा कि प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत दिल्ली से की जा सकती है।
केंद्र के वकील ने पीठ से कहा कि इसके लिए तेल विपणन कंपनियों को डीलरों के साथ बैठक करनी होगी।
पीठ ने कहा, “आप प्रायोगिक परियोजना शुरू करें।”
उसने केंद्र के वकील से उच्चतम न्यायालय के चार अगस्त के फैसले में दिए गए निर्देशों पर अमल के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश करने को भी कहा, जिसमें समय-सीमा शामिल हो।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त के लिए तय की।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों की संख्या और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों के प्रभाव पर भी ध्यान दिया था। उसने केंद्र को कुछ चुनिंदा गलियारों में ऐसी प्रायोगिक परियोजनाएं लागू करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने के बजाय टोल बिंदुओं से गुजरने वाले वाहनों की स्वचालित पहचान की व्यवस्था की जाए।
भाषा पारुल पवनेश
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