सोशल मीडिया का उपयोग सूचना देने के लिए नहीं, लोगों की चिंताएं सुनने व हल करने में भी करें:मुर्मू

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सोशल मीडिया का उपयोग सूचना देने के लिए नहीं, लोगों की चिंताएं सुनने व हल करने में भी करें:मुर्मू

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 07:01 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 07:01 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका समाधान करने के लिए भी करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलने आए थे। राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आपको सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इसके साथ ही आपकी जिम्मेदारी लोगों की बात सुनने की भी है। आपको जनता की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास करना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार प्रभावी और नागरिक केंद्रित हो।’’

मुर्मू ने कहा कि तेजी से जटिल होते सूचना माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और भ्रामक सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज के दौर में जब गलत सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं, तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को सही और प्रमाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।’’

राष्ट्रपति ने नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संचार माध्यमों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि लोगों से सार्थक दोतरफा संवाद सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में, जहां सूचनाएं तुरंत फैलती हैं, संचार में हमेशा सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मुर्मू ने अधिकारियों से नवीनतम तकनीकी साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने कहा कि नवाचार को नैतिक मूल्यों, मानवीय समझ और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए अपनाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे में जब भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘जानकारी रखने वाला नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकता है। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि भारत की समृद्ध विविधता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ संवाद करें।’’

राष्ट्रपति से भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उन्हें (प्रशिक्षु आईएसएस को) संबोधित करते हुए कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तथ्यों पर आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमेशा याद रखें कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको आंकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाना चाहिए।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज के आंकड़ा आधारित दौर में प्रभावी सार्वजनिक नीतियां काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों का आधार बनते हैं।’’

उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकी व्यवस्था डिजिटल तकनीक और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के माध्यम से महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक त्वरित और विस्तृत जानकारी तैयार करने के नए अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन बदलावों के साथ आप पर सांख्यिकीय निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।’’

मुर्मू ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा दोनों का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रभावी संवाद और विश्वसनीय जानकारी जीवंत एवं उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।’’

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील और ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘आपको मिली जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की गहरी जिम्मेदारी जुड़ी है। आपका ज्ञान और कौशल महत्वपूर्ण होगा, लेकिन नागरिकों के प्रति आपका चरित्र, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता ही अंततः आपके योगदान को परिभाषित करेगी।’’

भाषा अमित पवनेश

पवनेश