नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तमिलनाडु सरकार को दिसंबर 2025 के अपने उस निर्देश का पालन करने का आदेश दिया, जिसमें राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि की पहचान करने को कहा गया था।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘सहकारी संघवाद होना चाहिए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘कल अगर केंद्र सरकार समवर्ती सूची में कोई नीति लेकर आती है और अगर हर राज्य यह कहना शुरू कर देता है कि मैं आपकी नीति को स्वीकार नहीं करता हूं, तो हमारे संघीय ढांचे का क्या होगा?’’
शीर्ष अदालत राज्य की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय के सितंबर 2017 के निर्देश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के निर्देश में प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय की स्थापना को सुगम बनाने के लिए कदम उठाने को कहा गया था।
पीठ ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से अपनी सोच बदलने को भी कहा।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत के 15 दिसंबर 2025 के आदेश को वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया गया है।
पिछले साल दिसंबर में दिए गए अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने राज्य को अपने प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हम उस आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं।’’
पीठ ने कहा कि 15 दिसंबर से आज तक राज्य में सरकार बदल चुकी है।
इसने कहा, ‘‘चाहे स्थिति जो भी हो, हम याचिकाकर्ता राज्य को निर्देश देते हैं कि वह 15 दिसंबर, 2025 के हमारे आदेश का अनुपालन करे, जिसके तहत याचिकाकर्ता राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि की पहचान की जानी है।’’
उसने कहा कि यह निर्देश राज्य की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के फैसले के अधीन रहेगा।
पीठ ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में हम राज्य सरकार को उक्त निर्देश का पालन करने के लिए तीन महीने का समय देते हैं।’’
उसने राज्य और केंद्र के प्रतिनिधियों से वहां इन विद्यालयों की स्थापना के संबंध में आगे चर्चा करने को कहा।
सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य के वकील से कहा, ‘‘सबसे पहले आपकी सोच बदलनी होगी। अगर आप यह कहते हैं कि मैं नवोदय विद्यालय नहीं चाहता क्योंकि मैं तमिलनाडु की धरती पर हिंदी पढ़ाया जाना नहीं चाहता…’’
गुप्ता ने कहा कि राज्य तमिलनाडु में हिंदी की पढ़ाई का बिल्कुल भी विरोध नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘तमिलनाडु में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जहां हिंदी पढ़ाई जाती है।’’
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि राज्य की ओर से केवल भूमि उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘बाकी सभी चीजों का ध्यान केंद्र सरकार रखेगी। राज्य सरकार पर बिल्कुल भी कोई बोझ नहीं पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि भाषा नीति से जुड़े मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है।
पीठ ने दोनों पक्षों से आपस में बातचीत करने और इस मुद्दे का समाधान निकालने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘चेन्नई के लोगों को दिल्ली से अलगाव महसूस नहीं करना चाहिए और इसी तरह दिल्ली को भी…।’’
इसने इस बात पर जोर दिया कि सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हम न तो आपको अलग कर रहे हैं और न ही उन्हें (अलग कर रहे हैं)। आपके राज्य में एक अन्य प्रकार के विद्यालय आएंगे, जो केवल आपके उन उच्च मानकों को और बेहतर बनाएंगे, जिनसे हम अवगत हैं। इससे आपके मानक कमतर नहीं होंगे।’’
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 14 दिसंबर तय की।
तमिलनाडु सरकार ने नवोदय विद्यालयों द्वारा अपनाये जाने वाले त्रि-भाषा नीति पाठ्यक्रम को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए राज्य में इनकी स्थापना का विरोध किया है।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश