न्यायालय ने भारतीय मिशन में वीजा-पासपोर्ट सेवाओं के संबंध में केंद्र की याचिका खारिज की
न्यायालय ने भारतीय मिशन में वीजा-पासपोर्ट सेवाओं के संबंध में केंद्र की याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा स्थित भारतीय मिशन में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा सेवाओं की ‘आउटसोर्सिंग’ के लिए जारी निविदा प्रक्रिया को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती संबंधी केंद्र की याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दिया था।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने विदेश मंत्रालय और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को नयी निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक सेवाओं का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की अनुमति दे दी।
न्यायालय ने कहा कि विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनने और तथ्यों पर गौर करने के बाद हमारा विचार है कि नयी निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित प्रतिष्ठानों के रोजमर्रा के कामकाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।’’
सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत ने संबंधित आदेश में संशोधन किया।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ईआईएल और विदेश मंत्रालय को संबंधित सेवाओं को जारी रखने के लिए उपयुक्त अंतरिम व्यवस्था करने की स्वतंत्रता होगी। ऐसी अंतरिम व्यवस्था के तहत संतोषजनक प्रदर्शन करने वाले एल-1 (सबसे कम बोली लगाने वाले) सफल बोलीदाताओं या किसी अन्य एजेंसी को भी नियुक्त किया जा सकता है, जैसा ईआईएल और विदेश मंत्रालय उचित समझें।’’
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी होगी और इससे किसी भी पक्ष के पक्ष में कोई विशेष अधिकार या दावा उत्पन्न नहीं होगा। साथ ही, यह नए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) प्रक्रिया के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।
पीठ केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 17 जुलाई के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद सरकार को नया अनुरोध प्रस्ताव जारी करने का निर्देश दिया था।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि उच्च न्यायालय के फैसले का विदेशों में स्थित भारतीय मिशन के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके कारण दूतावासों के कर्मचारियों को अपने नियमित दायित्वों से हटकर वीजा संबंधी सेवाओं का प्रबंधन करना पड़ रहा है।
मेहता ने कहा, ‘‘हमारे दूतावासों के कर्मचारियों को अन्य कार्यों से हटाकर इस काम में लगाना पड़ा है। पहले भी निविदा हासिल करने वाले पक्ष की ओर से हमेशा किसी न किसी तरह का मुकदमा किया जाता था। लेकिन इस बार हमने उन्हें खुली निविदा प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दिया।’’
सॉलिसिटर जनरल ने सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अलग-अलग भारतीय मिशन में सेवाओं के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों को एक ही पैमाने पर यांत्रिक ढंग से तुलनात्मक अंक नहीं दिए जा सकते।
इससे पहले 17 जुलाई को प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की उस याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई थी, जिसमें कुछ भारतीय मिशन में वीज-पासपोर्ट सेवाओं की ‘आउटसोर्सिंग’ के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा को रद्द करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नए सिरे से अनुरोध प्रस्ताव जारी करने और नयी निविदा आमंत्रित करने का निर्देश दिया था।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश

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