न्यायालय ने वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ को गिरफ्तारी से मिला संरक्षण बहाल किया

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न्यायालय ने वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ को गिरफ्तारी से मिला संरक्षण बहाल किया

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 07:59 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 07:59 PM IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तेंदुए के कथित शिकार के मामले में ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिला संरक्षण बहाल कर दिया है।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सत्यनारायण को निर्देश दिया कि वह 28 सितंबर को सुबह 11 बजे वन अधिकारियों के सामने पेश हों और जांच में पूरा सहयोग करें।

पीठ ने कहा, “मामले के गुण-दोष पर कोई राय जाहिर किए बिना, हम विशेष अनुमति याचिका (या याचिकाओं) का निपटारा इस निर्देश के साथ करते हैं कि रिट याचिकाओं के निस्तारण तक… दो सितंबर को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश…लागू रहेगा।”

यह आदेश सत्यनारायण की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत तेंदुए के कथित शिकार के मामले में उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने हाल ही में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया और गिरफ्तारी से सत्यनारायण को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली।

एक खबर के अनुसार, मध्य प्रदेश वन विभाग के इस आरोप के बाद कि सत्यनारायण ने अपने खिलाफ जारी तीसरे समन और गिरफ्तारी वारंट को छिपाया था, उच्च न्यायालय ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश

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