नई दिल्ली। दलित संगठनों और सांसदों के दबाव में केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच FIR और गिरफ्तारी का प्रावधान दोबारा जोड़ने का फैसला कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रावधानों पर पिछले 20 मार्च को रोक लगा दी थी। इस फैसले के बाद देशभर में दलित समुदाय आक्रोशित था। इसके विरोध में 2 अप्रैल को हुए भारत बंद में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और 15 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
पढ़ें- पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज, भड़काऊ बयान देकर तनाव पैदा करने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी करने के लिए बुधवार को कैबिनेट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संशोधन विधेयक, 2018 को मंजूरी दी। विधेयक को कानून का रूप देने के लिए संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ही पेश किया जा सकता है। विधेयक को मंजूरी की जानकारी केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने दी।
पढ़ें- दुआओं का असर, बोरवेल से सलामत निकली सना, 30 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हालांकि फैसलों की जानकारी देने के लिए बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद सत्र चालू होने की वजह से विधेयक के प्रावधानों का ब्योरा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि एससी-एसटी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सरकार किसी भी हद तक जाएगी। सरकार ने दलित संगठनों से नौ अगस्त को प्रस्तावित बंद को वापस लेने की अपील की है।
वेब डेस्क, IBC24