न्यायालय ने महाराष्ट्र के बिजली शुल्क छूट वापस लेने के अधिकार को बरकरार रखा

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न्यायालय ने महाराष्ट्र के बिजली शुल्क छूट वापस लेने के अधिकार को बरकरार रखा

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 08:28 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 08:28 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी इस्तेमाल वाले बिजली संयंत्रों को दी गई बिजली शुल्क छूट को वापस लेने या संशोधित करने के महाराष्ट्र सरकार के अधिकार को बरकरार रखा।

शीर्ष अदालत ने हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित उद्योगों को ‘अचानक नीतिगत उलटफेर’ से सुरक्षा प्रदान की और ऐसी छूटों के प्रभावी होने से पहले एक वर्ष की नोटिस अवधि अनिवार्य कर दी।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने उच्च न्यायालय के उन पूर्व आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें राज्य सरकार द्वारा निजी इस्तेमाल वाले बिजली संयंत्रों के उत्पादन पर कर लगाने के कदम को खारिज कर दिया गया था।

पीठ ने कहा, “पांच अक्टूबर, 2009 और सात नवंबर, 2009 के फैसले व आदेश रद्द किए जाते हैं। हम (विद्युत) अधिनियम की धारा पांच ए के तहत दी गई छूट को वापस लेने या संशोधित करने के राज्य सरकार के अधिकार को बरकरार रखते हैं और मानते हैं कि ये छूट संबंधित तिथियों से एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद ही एक अप्रैल, 2001 से प्रभावी होंगी।”

यह विवाद बॉम्बे विद्युत शुल्क अधिनियम, 1958 के तहत महाराष्ट्र सरकार द्वारा अप्रैल 2000 और अप्रैल 2001 में जारी अधिसूचनाओं से उत्पन्न हुआ था।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश