नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय के अदालत कक्ष में एक वादी द्वारा कथित तौर पर अभद्र आचरण करने की कड़ी निंदा की। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी घटनाएं न्यायपालिका और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा को कम करती हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने कथित तौर पर अपशब्द कहे और अपने कानूनी कागज़ात फेंके, जिसके बाद उन्हें उच्चतम न्यायालय से जबरदस्ती बाहर निकाल दिया गया। वादी सुनवाई के दौरान खुद पेश हुआ था।
एससीएओआरए ने एक बयान में कहा कि उसकी कार्यकारी समिति ने उस घटना का “गंभीरता से संज्ञान” लिया है, जिसमें खुद पेश होने वाले एक वादी ने कथित तौर पर न्यायालय के सामने अपशब्दों का इस्तेमाल किया, अपमानजनक बातें कहीं और गलत व्यवहार किया।
एससीएओआरए ने कहा, “माननीय न्यायालय द्वारा दिखाई गई उदारता, धैर्य और संयम की गहरी सराहना करते हुए, समिति इस बात पर जोर देती है कि इस तरह की न्यायिक शालीनता और सहनशीलता को अधिकार या संकल्प की कमी नहीं समझा जाना चाहिए।”
उसने कहा कि “दिखावा” करने, प्रचार पाने या अदालत पर दबाव डालकर न्यायिक कार्यवाही का गलत इस्तेमाल करने की कोशिशें न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग हैं और इन्हें सख्ती से रोका जाना चाहिए।
इसमें कहा गया है, “ऐसा व्यवहार, जो अदालत की गरिमा को कम करता है और डरा-धमकाकर, सनसनी फैलाकर या प्रचार पाने वाले तरीकों से न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करता है, उसे सख्ती से रोका जाना चाहिए।”
एससीएओआरए ने आग्रह किया कि अदालत की गरिमा और अधिकार को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
एसोसिएशन ने ऐसी घटनाओं से जुड़े वीडियो, संदेश या अन्य सामग्री को रिकॉर्ड करने और फैलाने पर भी आपत्ति जताई। एसोसिएशन का कहना था कि इस तरह के प्रचार से न्यायिक कार्यवाही सनसनीखेज बन जाती है और संस्थान की गरिमा कम होती है।
यह घटना शुक्रवार को आंशिक कार्यदिवस के दौरान न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई।
भाषा प्रशांत दिलीप
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