नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम को दिल्ली और बिहार में अपने दो चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने इमाम की अंतरिम जमानत की याचिका मंजूर करते हुए कहा कि यह उसकी इस तरह की दूसरी याचिका है और इसे अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए दायर किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता की अंतरिम जमानत के लिए यह केवल दूसरी याचिका है और वह भी अपने चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के उद्देश्य से दायर की गई है, इसलिए अदालत उसके अनुरोध पर राहत देना उचित समझती है।’’
अदालत ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर उसे चार अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अंतरिम राहत दी।
आदेश के अनुसार, इमाम के चचेरे भाई दानिश इमाम और फहद इमाम की शादी क्रमशः चार अक्टूबर को नयी दिल्ली और सात अक्टूबर को बिहार के सासाराम में होने वाली है।
शादी से पूर्व की रस्में एक से तीन अक्टूबर तक बिहार के जहानाबाद जिले के काको स्थित इमाम के पारिवारिक आवास पर आयोजित की जाएंगी।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अनिरुद्ध मिश्रा ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इमाम के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उसकी नियमित जमानत की याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी हैं।
उन्होंने यह भी दलील दी कि शादी समारोह में इमाम की मौजूदगी जरूरी नहीं है और कहा कि वह अपने कई चचेरे भाई-बहनों की शादी के आधार पर बार-बार अंतरिम जमानत का अनुरोध कर सकता है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने दानिश इमाम और फहद इमाम की शादियों का सत्यापन किया है और उनका विवाह क्रमशः चार और सात अक्टूबर को होना तय है।
अदालत ने इमाम को अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान किसी गवाह या मामले से जुड़े किसी व्यक्ति से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया। साथ ही, उस अवधि में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने या किसी मीडियाकर्मी के संपर्क में आने पर भी रोक लगा दी।
उसे केवल अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने तथा उन स्थानों पर रहने का निर्देश दिया गया, जहां शादी समारोह और मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने से 53 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
अदालत ने इमाम को 10 अक्टूबर की शाम संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
भाषा आशीष नरेश
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