नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) लुटियन्स दिल्ली की दो अहम इमारतों – शास्त्री भवन और कृषि भवन को गिराने का काम जल्द शुरू किया जाएगा, जिनमें दशकों तक कई अहम मंत्रालयों का कामकाज होता रहा है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने सितंबर के आखिर तक इन इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
‘सेंट्रल विस्टा’ पुनर्विकास परियोजना के तहत बन रहे नए सरकारी कार्यालय परिसर के तहत बनाए जा रहे ‘कर्तव्य भवन 4 और 5’ इन दो पुरानी इमारतों की जगह लेंगे। 1956 और 1968 के बीच बनी ये पुरानी इमारतें केंद्र सरकार के मंत्रालयों के लिए प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम करती रही हैं।
सीपीडब्ल्यूडी के 16 सितंबर के एक पत्राचार के मुताबिक, प्रस्तावित नए कर्तव्य भवनों के निर्माण के लिए टेंडर दे दिया गया है।
प्रस्तावित इमारतें मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन की जगह पर ही बनेंगी, इसलिए सितंबर 2026 के आखिर तक इस स्थान को ‘सेंट्रल विस्टा’ पुनर्विकास परियोजना को संचालित कर रही एजेंसी को सौंपना ज़रूरी है।
इसमें कहा गया है, ‘‘क्रियान्वयन एजेंसी को समय पर जगह सौंपने और तय समय के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करने के लिए यह ज़रूरी है। इसलिए, मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर को तय समय के भीतर खाली करने और सौंपने के लिए प्राथमिकता के आधार पर ज़रूरी कदम उठाने का अनुरोध किया जाता है।’’
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर बने सात मंजिला शास्त्री भवन में दशकों तक शिक्षा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, और कोयला मंत्रालयों सहित कई मंत्रालयों और विभागों का कामकाज होता रहा है।
वहीं, कृषि भवन में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के दफ्तर रहे। पिछले कुछ महीनों में, कई मंत्रालयों और विभागों ने इन दो इमारतों को छोड़ दिया है और उच्च-सुरक्षा वाले सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में हाल में बने कर्तव्य भवनों में पहुंच गए हैं।
इन दो भवनों को खाली करना भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की उस योजना का अगला चरण है, जिसके तहत कर्तव्य पथ के किनारे बने पुराने सरकारी कार्यालय वाले भवनों की जगह नया साझा केंद्रीय सचिवालय परिसर बनाया जाएगा।
सरकार ने सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत 10 कर्तव्य भवन बनाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि अभी अलग-अलग इमारतों से काम कर रहे मंत्रालयों और विभागों को आधुनिक और एकीकृत कार्यालय परिसरों में लाया जा सके।
व्यापक पुनर्विकास योजना के तहत, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के दफ्तरों को भी दूसरी जगह भेज दिया गया है। इन ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ में बदलने का प्रस्ताव है।
भाषा वैभव नरेश
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