कोलकाता, एक मई (भाषा) कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में दैनिक यात्रियों को शुक्रवार को भी बसों की कमी के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि बड़ी संख्या में वाहन अब भी चुनाव कार्य में लगे हुए हैं और चार मई को मतगणना से पहले उनके लौटने की संभावना नहीं है।
स्थिति को स्वीकार करते हुए, ‘जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट’ के सचिव तपन बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी कार्यों के लिए लगभग 3,600 निजी बसों ली गयी थीं जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक अभी तक कार्य पर नहीं लौटी हैं।
बनर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि चुनाव के बाद भी ज्यादातर बसें नहीं छोड़ी गयीं क्योंकि उन्हें सुरक्षाकर्मियों एवं अधिकारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने समेत चुनाव बाद ड्यूटी में लगा दिया है तथा संभवत: चाई मई की मतगणना तक वे उपलब्ध नहीं होंगी।
इस कमी के कारण उपलब्ध परिवहन साधनों, विशेष रूप से मेट्रो रेलवे की ब्लू लाइन और ग्रीन लाइनों में भीड़भाड़ बढ़ गई है।
बनर्जी ने कहा कि यह व्यवधान विशेष रूप से उन मार्गों पर अधिक है जो निजी बसों पर अत्यधिक निर्भर हैं, जैसे कि गरिया स्टेशन से उल्टाडांगा तक ईएम बाईपास और वीआईपी रोड, बीटी रोड, जेस्सोर रोड और जीटी रोड खंड।
उन्होंने कहा, ‘‘मतगणना तिथि से पहले सेवाओं के सामान्य होने की संभावना नहीं है।’’
निजी बस संचालकों की बात दोहराते हुए, राज्य परिवहन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल परिवहन निगम लिमिटेड के तहत शहर और आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली 230 बसें अभी तक अपने डिपो में नहीं लौटी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य भर में एनबीटीसी, एसबीएसटीसी और अन्य राज्य परिवहन उपक्रमों की 700 बसों में से अधिकतर चुनाव ड्यूटी में लगी हुई हैं और स्थिति अगले सप्ताह के अंत तक पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।
शहर के दक्षिणी हिस्सों में (रूट 40बी पर) चलने वाली एक बस के परिचालक ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने हमें हावड़ा जिले के भीतरी इलाकों में चुनाव ड्यूटी से अस्थायी रूप से मुक्त कर दिया है। इसलिए हमें दो चक्कर जल्दी पूरे करने हैं।’’
उसने कहा,‘‘बाद में हम हावड़ा लौटेंगे और चार मई की दोपहर तक ही अपना नियमित काम फिर से शुरू कर पाएंगे।’’
टॉलीगंज के नकतला क्षेत्र के तकनीशियन समुद्र बसु ने बताया, ‘‘मैं ब्लूलाइन मेट्रो से शोभबाजार पहुंचता था और फिर वहां से बस लेकर राजारहाट, न्यू टाउन स्थित आईटी हब जाता था, जहां मेरा दफ्तर है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो दिनों से मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलते ही मुझे बहुत परेशानी हो रही है क्योंकि ऑटो-रिक्शा वाले उल्टाडांगा से आगे जाने से मना कर देते हैं। मुझे ऐप से दोपहिया वाहन बुक करने के लिए बहुत ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। मैं शीघ्र स्थिति सुधरने की उम्मीद कर रहा हूं।’’
भाषा
राजकुमार पवनेश
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