सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों की बैठक बुलाई, अटकलों पर लग सकता है विराम

सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों की बैठक बुलाई, अटकलों पर लग सकता है विराम

सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों की बैठक बुलाई, अटकलों पर लग सकता है विराम
Modified Date: May 27, 2026 / 02:05 pm IST
Published Date: May 27, 2026 2:05 pm IST

(तस्वीरों सहित)

(परिवर्तित स्लग के साथ)

बेंगलुरु, 27 मई (भाषा) कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरमैया बृहस्पतिवार को अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ नाश्ते पर एक बैठक की मेजबानी कर सकते हैं और इसके बाद राज्यपाल थावरचंद गहलोत को इस्तीफा सौंप सकते हैं।

सिद्धरमैया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए इस पद का रास्ता साफ कर सकते हैं।

हालांकि, वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी बनाए रखी। बुधवार को उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को बात करेंगे।

नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को उस समय और बल मिला, जब मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धरमैया और शिवकुमार के साथ कई दौर की लंबी बैठकें कीं।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि सत्ता हस्तांतरण की संभावना अब काफी प्रबल हो गई है।

कर्नाटक में पिछले साल से ही नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन 20 नवंबर 2025 को कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह बहस और तेज हो गई।

ऐसी खबरें हैं कि सिद्धरमैया बृहस्पतिवार को इस्तीफा देकर शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री के करीबी एक करीबी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हां, उन्होंने कल राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है।’’

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सिद्धरमैया राज्यपाल थावरचंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में समय-समय पर गृह मंत्री जी. परमेश्वर का नाम भी सामने आता रहा है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई बैठक पर कुछ भी कहने से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। साथ ही उन्होंने अपने मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को भी ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि पार्टी का फैसला सभी को मानना होगा।

इस बीच, सिद्धरमैया बृहस्पतिवार को अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों को नाश्ते पर आमंत्रित कर सकते हैं।

दिल्ली में मौजूद शिवकुमार पहले बुधवार दोपहर बेंगलुरु लौटने वाले थे, लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल दिया और अब वह बृहस्पतिवार को लौटेंगे। उनके भी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर होने वाली बैठक में शामिल होने की संभावना है।

पिछले वर्ष भी दोनों नेताओं ने नेतृत्व विवाद कम करने के प्रयास में एक-दूसरे के लिए नाश्ते का आयोजन किया था।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब खबरें हैं कि कांग्रेस आलाकमान ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत देते हुए सिद्धरमैया को पार्टी में केंद्रीय भूमिका तथा राज्यसभा सीट की पेशकश की है।

हालांकि सूत्रों के अनुसार सिद्धरमैया ने अभी तक इस केंद्रीय भूमिका को स्वीकार नहीं किया है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि चूंकि यह संदेश सीधे राहुल गांधी की ओर से आया है, इसलिए सिद्धरमैया पद छोड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री पहले भी कई बार कह चुके हैं कि यदि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनसे पद छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वह ऐसा करेंगे।

कांग्रेस ने मंगलवार को कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को ‘‘महज अटकलबाजी’’ बताया और कहा कि केंद्रीय व राज्य नेतृत्व के बीच दिनभर चली बैठकों का उद्देश्य केवल राज्यसभा और विधान परिषद के आगामी चुनावों पर चर्चा करना था।

सिद्धरमैया और शिवकुमार को मंगलवार को पार्टी ने दिल्ली बुलाया था, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल तथा रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ लगातार बैठकें हुईं।

इस बीच, बुधवार को मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया।

सिद्धरमैया ने जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर विधान सौधा में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं इस बारे में कल बात करूंगा।’’

उधर, परमेश्वर ने कहा कि सुरजेवाला के बेंगलुरु पहुंचकर आधिकारिक घोषणा करने की संभावना है।

दिल्ली दौरे में मुख्यमंत्री के साथ गए परमेश्वर ने नेतृत्व परिवर्तन या आलाकमान से हुई बातचीत पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री को बुलाया था। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी और महासचिवों से करीब तीन-चार घंटे तक मुलाकात की। अंदर क्या चर्चा हुई, यह हममें से किसी को नहीं पता। मीडिया में काफी अटकलें हैं।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या सिद्धरमैया ने बैठक के बारे में उनसे कुछ साझा किया, तो उन्होंने कहा, ‘‘कुछ भी चर्चा नहीं हुई।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने आलाकमान से कोई अवसर मांगा है, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने किसी वरिष्ठ नेता से मुलाकात नहीं की है।

सिद्धरमैया द्वारा मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किए जाने की खबरों पर परमेश्वर ने कहा, ‘‘अंदर क्या चर्चा हुई, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। जैसा कि कांग्रेस महासचिव ने कहा, चर्चा राज्यसभा और परिषद चुनावों को लेकर थी।’’

लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि आधिकारिक घोषणा होने तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी और बृहस्पतिवार की नाश्ता पर बुलाई गई बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह शिवकुमार की जगह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई है और वह आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे।

इस सवाल पर कि नई सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की जाती है तो क्या वह स्वीकार करेंगे, जारकीहोली ने कहा कि पार्टी का जो भी निर्णय होगा, सभी को उसे मानना पड़ेगा।

पार्टी के भीतर सिद्धरमैया खेमे से जुड़े कई ‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए कन्नड़ संक्षिप्त नाम) नेता चाहते हैं यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो मुख्यमंत्री पद उनके गुट के किसी नेता को मिले।

साथ ही ‘‘दलित मुख्यमंत्री’’ बनाए जाने की मांग भी उठ रही है। पार्टी के एक वर्ग द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और परमेश्वर के नामों की भी चर्चा की जा रही है।

परमेश्वर ने सिद्धरमैया की ओर से नाशते पर बुलाई गई बैठक को ‘‘शिष्टाचार बैठक’’ बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी कई बार अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों को भोजन पर आमंत्रित करते रहे हैं।

भाषा खारी मनीषा

मनीषा


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