हस्ताक्षर विवाद: तृणमूल कांग्रेस विधायक नयना बंदोपाध्याय के आवास पर पहुंची सीआईडी

हस्ताक्षर विवाद: तृणमूल कांग्रेस विधायक नयना बंदोपाध्याय के आवास पर पहुंची सीआईडी

हस्ताक्षर विवाद: तृणमूल कांग्रेस विधायक नयना बंदोपाध्याय के आवास पर पहुंची सीआईडी
Modified Date: May 29, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: May 29, 2026 12:03 am IST

कोलकाता, 28 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर में कथित गड़बड़ी की जांच के सिलसिले में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों का एक दल बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की विधायक नयना बंदोपाध्याय के आवास पहुंचा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि यह विवाद तब सामने आया जब इस बात पर सवाल उठाए गए कि विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के समर्थन में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के पत्र पर किया गया हस्ताक्षर क्या वास्तव में चौरंगी की विधायक (नयना बंदोपाध्याय) का ही था।

इस मामले के बाद विधानसभा के प्रधान सचिव ने हरे स्ट्रीट थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी और बाद में इस मामले को आपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दिया गया था।

बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे हस्तलेखन विशेषज्ञों और कोलकाता पुलिस के अधिकारियों के साथ सीआईडी का छह-सदस्यीय दल जांच के लिए विधायक के आवास पर पहुंचा। हालांकि, उस समय बंदोपाध्याय घर पर नहीं थीं, क्योंकि वह कथित तौर पर ईद-उल-अज़हा से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं।

विधायक के घर लौटने के बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे सीआईडी ​​का दल दोबारा उनके आवास पहुंचा।

उन्होंने बताया कि इसके बाद जांच एजेंसी के अधिकारियों ने पूछताछ की और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की।

अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘यह मामला विधानसभा के रिकॉर्ड से जुड़े हस्ताक्षरों के सत्यापन से संबंधित है। शिकायत उचित आधिकारिक माध्यमों से दर्ज कराई गई थी और प्रक्रिया के तहत ही जांच की जा रही है। लिखावट की जांच भी इस पूछताछ का एक हिस्सा है।’

सत्यापन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में सीआईडी ​​अधिकारियों ने उनके पैन कार्ड की भी जांच की।

बंदोपाध्याय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्होंने विपक्ष के नेता के चयन को लेकर छह मई को ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के दौरान पार्टी से जुड़े एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।

उन्होंने कहा, ‘उस समय पार्टी के फैसले के बाद एक प्रारूप तैयार किया गया था और मैंने उस पर हस्ताक्षर किए थे। हो सकता है कि वह हस्ताक्षर मेरे पुराने हस्ताक्षरों से मेल न खा रहा हो।’

पांच बार की विधायक ने इस घटनाक्रम पर हैरानी भी जताई।

उन्होंने कहा, ‘मैं 2001 में पहली बार विधायक बनी थी जब राज्य में वाम मोर्चा की सरकार थी। मुझे पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। मैंने इस बारे में शोभन दा को सूचित कर दिया है, और मैं उनसे बात करने के बाद विचार कर रही हूं कि क्या ममता बनर्जी को भी इसकी जानकारी दी जाए।’

इस बीच, चौरंगी सीट से बंदोपाध्याय के खिलाफ चुनाव हारने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेता संतोष पाठक ने आरोप लगाया कि विधायक और उनके पति के खिलाफ ‘कई शिकायतें’ हैं।

उन्होंने दावा किया, ‘हस्ताक्षर के मामले में भी अनियमितताएं संभव हैं।’

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश


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