अयोध्या (उप्र), 20 जून (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर में दान के पैसे के कथित गबन की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को डिजिटल सबूत जुटाने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों ने शनिवार को बताया कि मंदिर परिसर का सीसीटीवी फुटेज केवल 45 दिनों तक ही स्टोर रहता है, जिसके बाद रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट हो जाती है। इससे जांचकर्ताओं के लिए पुराने वीडियो रिकॉर्ड तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। यह टीम मंदिर के दान में हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, बैकअप सिस्टम में रिकॉर्डिंग सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रहती है। नतीजतन, जांचकर्ता पिछले महीनों या पुराने वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि कथित गबन कब शुरू हुआ और कितने समय तक चला।
सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डिलीट या बदले गए डेटा को प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘एसआईटी फोरेंसिक विश्लेषण के जरिए जितना संभव हो सके पुराना फुटेज हासिल करने की कोशिश करेगी।’’
अधिकारियों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर हुई किसी भी छेड़छाड़ के तकनीकी निशान फोरेंसिक जांच से मिल सकते हैं।
डिजिटल सबूतों की कमी के कारण एसआईटी अब मंदिर कर्मचारियों, अधिकारियों और संदिग्धों के बयानों पर ज्यादा निर्भर है। टीम इन बयानों की तुलना पहले गिरफ्तार आरोपियों के बयानों से कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में कई विरोधाभास मिले हैं, जिन्हें जांच में अहम सुराग माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों की सीमित उपलब्धता से जांच लंबी और कई चरणों वाली हो सकती है और अब जांच गवाहों के बयानों और संदिग्धों से पूछताछ पर केंद्रित है।
यह जांच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सात जून को दान के पैसे गायब होने के आरोप लगाने के बाद शुरू हुई थी, जिससे सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव हो गया था। वहीं, ट्रस्ट का कहना है कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और अब तक आरोपों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह विवाद सामने आने के बाद शुक्रवार को अपने अयोध्या के पहले दौरे में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए रामभक्तों को भरोसा दिया कि एसआईटी जांच ‘‘दूध का दूध और पानी का पानी’’ कर देगी।
भाषा सं आनन्द
शफीक
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