नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी और अन्य एनसीआर शहरों को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों पर वाहनों की भीड़भाड़ कम करने के प्रयास के तहत, दिल्ली सरकार और केंद्र संयुक्त रूप से छह प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम करेगा।
यह कदम केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री द्वारा इस संबंध में की गई समीक्षा के एक सप्ताह बाद उठाया गया है, जिस दौरान एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की भीड़भाड़ कम करने की योजना पर चर्चा हुई थी।
स्वीकृत योजनाओं में से एक ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड-टू (यूईआर-टू) दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लिंक परियोजना’ है।
इस परियोजना के तहत, लगभग 17 किलोमीटर लंबा छह लेन का गलियारा गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी के पास यूईआर-टू से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा, जिसकी अनुमानित लागत 3,500 करोड़ रुपये है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की जारी एक एक बयान के अनुसार, ‘‘इस परियोजना से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बारापुला कॉरिडोर, मुकरबा चौक, सिंघु बॉर्डर और आश्रम-बदरपुर मार्ग जैसे मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। परियोजना वर्तमान में संरेखण को अंतिम रूप देने के चरण में है और निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर कई सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू करेगी, जो भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर होंगी।
एक अन्य प्रस्तावित परियोजना ‘दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे नोएडा-फरीदाबाद कनेक्टिविटी कॉरिडोर’ है। लगभग 65 किलोमीटर लंबी और छह लेन वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,500 करोड़ रुपये है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘‘यह गलियारा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, डीएनडी, फरीदाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा।’’
इससे लोनी, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा और फरीदाबाद की कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है, साथ ही कालिंदी कुंज, सराय काले खां और आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक जाम कम होगा। कार्य दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली-अमृतसर-कटरा गलियारा को यूईआर-टू से जोड़ने वाली परियोजना का भी उल्लेख किया।
गुप्ता ने कहा, ‘‘प्रस्ताव के तहत, दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे से आने वाले यातायात को यूईआर-टू और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तक सीधी पहुंच मिलेगी। सत्रह किलोमीटर लंबे, छह लेन वाले इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत 1,500 करोड़ रुपये है और इसका निर्माण मार्च 2027 तक शुरू किये जाने का लक्ष्य है।’’
कालिंदी कुंज इलाकों में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए, अधिकारियों ने दिल्ली-नोएडा-फरीदाबाद गलियारा पर यातायात को सुगम करने के लिए ओखला बैराज के पास एक ‘इंटरचेंज’ बनाने की योजना बनाई है।
बयान में कहा गया है, ‘‘लगभग 300 करोड़ रुपये की इस परियोजना में 500 मीटर लंबा, छह लेन का इंटरचेंज और फ्लाईओवर का निर्माण शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य कालिंदी कुंज में वाहनों की भीड़ कम करना और नोएडा, जसोला, सरिता विहार और फरीदाबाद के बीच सिग्नल-मुक्त कनेक्टिविटी प्रदान करना है।’’
एक अन्य परियोजना, ‘एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर’ की अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये है, और 20 किलोमीटर लंबी छह लेन की इस सड़क का निर्माण अप्रैल 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस परियोजना से दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात सुगम हो जाएगा। एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिये एम्स, आईएनए, हौज खास और वसंत कुंज को पड़ोसी राज्य हरियाणा से जोड़ने वाली सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी।’’
गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार ‘शिव मूर्ति-नेल्सन मंडेला मार्ग सुरंग परियोजना’ पर भी काम कर रही है। यह प्रस्तावित भूमिगत सुरंग लगभग आठ किलोमीटर लंबी और छह लेन वाली होगी।
इस परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत 7,000 करोड़ रुपये है।
बयान में कहा गया है कि यह द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज से जोड़कर बाहरी दिल्ली के क्षेत्रों से सिग्नल-मुक्त कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर, रंगपुरी और धौला कुआं क्षेत्रों में यातायात जाम की समस्या कम होगी।
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