नारे, सेल्फी और बिखरे पर्चे: डीयू के नॉर्थ कैंपस में दिखा छात्र संघ चुनाव का रंग

Ads

नारे, सेल्फी और बिखरे पर्चे: डीयू के नॉर्थ कैंपस में दिखा छात्र संघ चुनाव का रंग

  •  
  • Publish Date - September 18, 2026 / 03:32 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 03:32 PM IST

(मानसी जगानी)

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) सड़कों पर गूंजते चुनावी नारे, मतदान केंद्रों की ओर समूहों में बढ़ते छात्र और सड़कों व फुटपाथों पर बिछे प्रचार पर्चे… दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए शुक्रवार को नॉर्थ कैंपस में मतदान शुरू होते ही हर तरफ चुनावी माहौल नजर आया।

मेट्रो स्टेशन से लेकर कॉलेजों के मुख्य द्वारों तक चुनाव की गहमागहमी साफ दिखाई दे रही थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे और उम्मीदवारों के नाम वाले पर्चे तथा कार्ड बांट रहे थे।

छात्रों के विभिन्न समूह कॉलेजों के बाहर खड़े होकर अन्य छात्रों से अपने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे थे, जबकि चुनाव प्रचार में जुटे कार्यकर्ता एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज का दौरा कर रहे थे। मतदान करने के बाद छात्र चाय और आइसक्रीम की दुकानों पर एकत्र हुए, जहां वे उम्मीदवारों, अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और डूसू चुनाव से परिसर में आने वाले संभावित बदलावों पर चर्चा व बहस करते दिखे।

प्रथम वर्ष के छात्र समूहों में घूमते दिखाई दिए, जबकि कॉलेजों के बाहर तस्वीरें खिंचवाने के लिए निर्धारित किए गए ‘सेल्फी बूथ’ स्थान छात्रों के आकर्षण का केंद्र बने रहे, जहां कई युवा तस्वीरें खिंचवाने के लिए रुके।

पहली बार मतदान कर रहे कुछ छात्रों के लिए यह चुनाव विश्वविद्यालय स्तर की छात्र राजनीति के व्यापक स्तर को करीब से देखने का पहला अनुभव भी था। लगभग दो महीने पहले ही विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले कई नए छात्रों ने बताया कि उनके मतदान के फैसले पर उनके दोस्तों का प्रभाव रहा।

छात्रों के अनुसार, बुनियादी सुविधाएं, फीस में बढ़ोतरी, मासिक धर्म अवकाश और छात्र आवास से जुड़े मुद्दे उनके लिए मुख्य प्राथमिकता रहे। इसमें हाल ही में सत्य निकेतन इलाके में हुई दुखद घटना से जुड़ी चिंताएं भी शामिल थीं, जहां लड़कों के एक पांच मंजिला पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास इमारत के ढह जाने से छात्रों सहित सात लोगों की मौत हो गई थी।

किरोड़ीमल कॉलेज में बीए (ऑनर्स) भौतिक विज्ञान के प्रथम वर्ष के एक छात्र ने बताया कि प्रयोगशालाओं की स्थिति और बुनियादी सुविधाएं उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

छात्र ने कहा, ‘वोट किसे देना है, इसका फैसला करने में मेरे दोस्तों की भूमिका रही। हमने आपस में चर्चा की और फिर मिलकर निर्णय लिया।’

विश्वविद्यालय के आसपास की सड़कों पर भी चुनावी प्रचार का असर साफ दिख रहा था। एसयूवी गाड़ियां और अन्य वाहनों में सवार लोग सनरूफ से पर्चे और कार्ड हवा में उछाल रहे थे, जबकि मोटरसाइकिल सवार कार्यकर्ता एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज जाते हुए कार्ड बांट रहे थे। उम्मीदवारों के नाम वाले पर्चे सड़कों और फुटपाथों पर बिखरे पड़े थे।

इस स्थिति पर चिंता जताते हुए एक छात्र ने कहा, ‘लोग अपनी गाड़ियों से पर्चे फेंक कर चले जा रहे हैं, लेकिन इस गंदगी को साफ कौन करेगा? पूरी सड़कें और कैंपस के फुटपाथ पर्चों से पटे पड़े हैं।’

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान अभाविप और एनएसयूआई जैसे छात्र संगठनों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार जैसे कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, पिज्जा और हाथ वाले पंखे बांटे थे।

मतदान से ठीक पहले के दिनों में चुनाव प्रचार कक्षाओं तक पहुंच गया था। कुछ छात्रों ने बताया कि प्रचार गतिविधियों के कारण उनकी पढ़ाई का नुकसान हुआ और कई बार शिक्षक इस व्यवधान से नाराज होकर कक्षाएं छोड़कर चले गए।

क्षेत्र में हर तरफ बिखरी प्रचार सामग्री के बीच, सड़कों पर रहने वाले बेघर लोगों के बच्चे सड़कों और फुटपाथों से पर्चे चुनते हुए देखे गए। इनमें से कुछ बच्चे इन पर्चों को छात्रों और राहगीरों के बीच बांट भी रहे थे। वहीं, कुछ कॉलेजों के बाहर राजनीतिक दलों से जुड़े लोग छात्रों के पास जाकर उनसे उनके वोट के बारे में जानकारी लेते नजर आए।

जो छात्र वर्षों से परिसर की राजनीति को देखते आ रहे थे, उनके लिए उम्मीदवारों और मुद्दों के विकल्प जाने-पहचाने थे। वहीं, हाल ही में दिल्ली में बाहर से आए अन्य छात्रों के लिए यह दिन विश्वविद्यालय चुनाव की एक अनोखी दुनिया से परिचय कराने वाला था, जिसमें एक तरफ राजनीतिक मुकाबला, तो दूसरी तरफ सामाजिक मेल-जोल और नॉर्थ कैंपस की सड़कों का चुनावी नजारा था।

भाषा सुमित नरेश

नरेश