सोनाक्षी सिन्हा ने सोनम वांगचुक का किया समर्थन, भूख हड़ताल पर सरकार की चुप्पी को लेकर उठाए सवाल

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सोनाक्षी सिन्हा ने सोनम वांगचुक का किया समर्थन, भूख हड़ताल पर सरकार की चुप्पी को लेकर उठाए सवाल

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 05:58 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 05:58 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने बृहस्पतिवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाई, जो पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने अब तक वांगचुक के साथ बातचीत क्यों शुरू नहीं की, जो देश के बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन में 28 जून को शामिल होने के बाद से वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं।

अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में ‘दहाड़’ की अभिनेत्री ने कहा कि वह चुप नहीं रह सकतीं, खासकर ऐसे समय में जब दूसरों ने कुछ भी न बोलने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इससे पहले कभी इस तरह का सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन अब मैं और चुप नहीं रह सकती। हम सभी सोनम वांगचुक को जानते हैं। हम जानते हैं कि उन्होंने देश के लिए क्या किया है, उनकी उपलब्धियां क्या हैं और उन्हें मिले कई सम्मान के बारे में भी जानते हैं।’’

अभिनेत्री ने कहा, ‘‘पिछले 18 दिन से वह भूख हड़ताल पर हैं। और क्यों? क्योंकि वह बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं, उस भविष्य के लिए जिसके बारे में उनका मानना है कि बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है।’’

अभिनेता-नेता शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी ने कहा कि वांगचुक उन बच्चों के लिए आवाज उठा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान गंवाई है। अभिनेत्री ने कहा कि वह ऐसी व्यवस्था के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके बारे में हम सभी जानते हैं कि वह उस तरह काम नहीं कर रही है, जैसा उसे करना चाहिए।

सोनाक्षी ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) और देश के युवाओं की ‘‘सच्चाई और बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठाने’’ को लेकर सराहना की।

उन्होंने वीडियो के अंत में कहा, ‘‘जो कुछ हो रहा है, वह सही नहीं है। मैं बस इतना कहना चाहती थी। हमें सभी को अपनी आवाज उठानी चाहिए और अपनी आंखें खोलनी चाहिए, चाहे दूसरे ऐसा करें या न करें। मैं केवल यही कहना चाहती थी।’’

भाषा आशीष नरेश

नरेश