(फाइल फोटो के साथ)
जोधपुर/दिल्ली/लेह, 14 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किए जाने के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (59) को शनिवार दोपहर राजस्थान की जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।
इस कदम का राजनीतिक दलों और लद्दाख में आंदोलन कर रहे संगठनों ने स्वागत किया है।
इससे पहले, केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
वांगचुक संबंधित अधिनियम के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही बिता चुके हैं।
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। विरोध-प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 22 पुलिसकर्मियों सहित 45 से अधिक लोग घायल हुए थे।
उन्हें लेह के जिलाधिकारी के आदेश पर ‘‘जनव्यवस्था बनाए रखने’’ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था और फिर जोधपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
रातानाडा थाना प्रभारी दिनेश लखावत ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार के आदेश के बाद वांगचुक को आज दोपहर करीब 1:30 बजे जेल से रिहा कर दिया गया।’’
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए यहां मौजूद थीं।
केंद्र सरकार ने कहा कि यह निर्णय लद्दाख में शांति को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा था कि वह वांगचुक के भाषणों के वीडियो इस सप्ताह देखेगा और उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका पर 17 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगा।
सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को संभव बनाने के लिए लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
इसने कहा, ‘‘सरकार ने इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए और समुचित विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।’’
बयान में कहा गया कि वांगचुक पहले ही रासुका के तहत हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके हैं।
इसमें कहा गया कि सरकार क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का समाधान करने के उद्देश्य से लद्दाख में विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क बनाए हुए है।
सरकार ने कहा कि हड़तालों और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय चरित्र के लिए हानिकारक रहा है और इससे विद्यार्थियों, नौकरी के अभ्यर्थियों, कारोबारियों, टूर ऑपरेटर एवं पर्यटकों सहित समुदाय के विभिन्न वर्गों तथा समूची अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
सरकार ने लद्दाख के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने की अपनी ‘‘प्रतिबद्धता’’ दोहराते हुए उम्मीद जताई कि लद्दाख के लोगों की चिंताओं के समाधान के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति और अन्य उपयुक्त मंचों सहित रचनात्मक सहभागिता एवं संवाद के जरिये क्षेत्र की समस्याओं का हल निकाला जाएगा।
वांगचुक ने दो दिन पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि लद्दाख के न्यायपूर्ण भविष्य के लिए ईमानदार बातचीत जरूरी होगी।
कांग्रेस नेता और जलवायु कार्यकर्ता के वकील विवेक तन्खा ने जोर देकर कहा कि वांगचुक एक राष्ट्रवादी हैं और लद्दाख की सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
तन्खा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं ‘ग्लेशियर मैन’ सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत करता हूं। पहले दिन से ही हम कह रहे थे कि सरकार ने गलत दिशा में कदम उठाया है। वांगचुक एक राष्ट्रवादी, एक शिक्षक और जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता हैं। लद्दाख की सुरक्षा और स्थिरता के लिए वांगचुक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।’’
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत को रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया।
हालांकि, सक्सेना ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में बंद और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है तथा लोगों की आकांक्षाओं एवं चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों को हितधारकों के साथ संवाद के जरिए सुलझाया जाएगा।
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (केडीए) ने इस रिहाई को लद्दाख के लोगों के लिए ‘‘बड़ी जीत’’ बताया है।
एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने लेह में कहा, ‘‘यह सिर्फ वांगचुक का मामला नहीं है, बल्कि पूरे लद्दाख का मामला है। हमने शुरू से ही यह कहा था कि उन पर लगे सभी आरोप, जिनमें राष्ट्रविरोधी होने का आरोप भी शामिल है, निराधार थे। आज लद्दाख की बात सही साबित हुई है।’’
उन्होंने कहा कि वांगचुक की रिहाई के बावजूद लद्दाख की राजनीतिक मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
दोरजे ने कहा कि उनकी मुख्य मांगें अपरिवर्तित हैं और संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि समूह मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा की अपील के मद्देनजर 16 मार्च को लेह और कारगिल दोनों में प्रस्तावित विरोध रैली पर निर्णय लेगा।
उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए अन्य दो नेताओं को 23 मार्च को अदालत में अगली सुनवाई में जमानत मिलने की उम्मीद है।
लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा ने वांगचुक की रिहाई का स्वागत किया तथा सरकार से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की उनकी मांगों को स्वीकार करने का आग्रह किया।
हनीफा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत करते हैं। साथ ही अन्य बंदियों को भी रिहा किया जाना चाहिए, और सरकार को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी वापस लेना चाहिए।’’
केडीए के सदस्य सज्जाद कारगिली ने फेसबुक पर एक पोस्ट में डेलदान नामग्याल और स्मानला दोरजे की तत्काल रिहाई की मांग की तथा सरकार से अन्य सभी बंदियों के खिलाफ सभी आरोप बिना शर्त हटाने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘सोनम वांगचुक के खिलाफ रासुका को रद्द करना एक स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि, हमारे वैध अधिकारों के लिए हमारा संघर्ष जारी है।’’
वांगचुक की रिहाई स्वागत करते हुए, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में अमेरिका और इजराइल विरोधी प्रदर्शनों के दौरान घाटी में गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग की।
श्रीनगर में वसंत उत्सव से इतर पत्रकारों से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘उन्हें (वांगचुक) गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए था। उनकी गिरफ्तारी गलत थी और वह भी रासुका के तहत।’’
उन्होंने कहा कि लद्दाख में स्थिति स्थिर रहनी चाहिए। अब्दुल्ला ने इस बात पर बल दिया कि जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर से किए गए वादे पूरे किए जाने चाहिए, वही बात लद्दाख पर भी लागू होती है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने वांगचुक की हिरासत रद्द करने के केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरणविद् के खिलाफ इस कठोर कानून को लागू नहीं किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने भी जलवायु कार्यकर्ता की रिहाई का स्वागत किया और उन परिस्थितियों पर सवाल उठाए जिनके कारण उन्हें छह महीने से अधिक समय तक ‘‘स्पष्ट औचित्य के बिना’’ हिरासत में रखा गया था।
कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के विधायक महराज मलिक की रिहाई की भी मांग की, जिन्हें पिछले साल सितंबर में जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था।
वहीं, इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे यह उजागर होता है कि कैसे व्यक्तियों को ‘‘बिना सबूत के महीनों तक जेल में रखा जा सकता है।’’
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वांगचुक का मामला दिल्ली आबकारी नीति मामले में उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुए बर्ताव की याद दिलाता है।
केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें मनगढ़ंत आरोपों के तहत महीनों और वर्षों तक जेल में रखा गया।
पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गई है। एक वैज्ञानिक और जलवायु कार्यकर्ता को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया।’’
भाषा शफीक नेत्रपाल
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