आरटीआई अधिनियम के तहत पति या पत्नी की आय का विवरण नहीं मांगा जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय

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आरटीआई अधिनियम के तहत पति या पत्नी की आय का विवरण नहीं मांगा जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - May 3, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - May 3, 2026 / 05:11 PM IST

नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि कोई व्यक्ति सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आवेदन दाखिल करके अधिकारियों से अपने पति या पत्नी की आय का विवरण प्राप्त नहीं कर सकता।

उच्च न्यायालय ने यह फैसला तब दिया जब एक महिला ने दावा किया कि भरण-पोषण के उसके दावे के उचित निपटारे के लिए यह जानकारी आवश्यक है।

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि सार्वजनिक हित से संबंधित न होने पर व्यक्तिगत जानकारी को अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत प्रकटीकरण से छूट दी गई है और उच्चतम न्यायालय के अनुसार, किसी व्यक्ति का आयकर रिटर्न उस श्रेणी में आता है।

अदालत महिला के पति की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें आयकर अधिकारियों को उसकी अलग रह रही पत्नी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन पर वित्त वर्ष 2007-2008 के लिए उसकी अगली कर योग्य आय का विवरण प्रकट करने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने सीआईसी द्वारा 2021 में पारित आदेश को ‘‘कानूनी रूप से अस्थिर’’ बताते हुए 28 अप्रैल को दिए अपने फैसले में कहा कि पत्नी द्वारा मांगी गई जानकारी निस्संदेह याचिकाकर्ता की ‘व्यक्तिगत जानकारी’ थी, जिसे प्रकट करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता क्योंकि यह ‘‘व्यापक जनहित’’ के अपवाद के अंतर्गत नहीं आती।

पत्नी ने तर्क दिया कि आरटीआई अधिनियम के तहत याचिकाकर्ता के आय विवरण का खुलासा उसके भरण-पोषण के दावे के उचित निपटारे के लिए आवश्यक है।

भाषा शोभना नेत्रपाल

नेत्रपाल