राज्य, जनता को मजबूर नहीं किया जा सकता: केरल उच्च न्यायालय ने विझिंजम बंदरगाह के प्रदर्शन पर कहा
राज्य, जनता को मजबूर नहीं किया जा सकता: केरल उच्च न्यायालय ने विझिंजम बंदरगाह के प्रदर्शन पर कहा
कोच्चि, 16 नवंबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विझिंजम बंदरगाह के मार्ग को अवरुद्ध करके राज्य और जनता को मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया कि उसके निर्देशों को लागू किया जाए।
न्यायमूर्ति अनु शिवरमन ने कहा कि तिरुवनंतपुरम जिले के मुल्लूर में बहुउद्देश्यीय बंदरगाह पर चल रहे आंदोलन की आड़ में किसी को राजनीति करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने आदेश दिया कि आज की तारीख तक जारी उसके निर्देशों को लागू किया जाए और 22 नवंबर को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए।
अडाणी समूह और बंदरगाह निर्माण के लिए उसके द्वारा अनुबंधित कंपनी की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ये निर्देश दिये। याचिकाओं में आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तथा अदालत के आदेश के अनुपालन का अभाव है।
अडाणी समूह की ओर से कहा गया कि बंदरगाह तक मार्ग को अवरुद्ध नहीं करने के अदालत के अनेक आदेशों के बावजूद हालात में कोई बदलाव नहीं है और प्रदर्शनकारियों के जिस तंबू को हटाने का आदेश दिया गया था, वह अब भी वहीं है।
दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी मछुआरों ने दावा किया है कि बातचीत चल रही है और इलाके में तनावपूर्ण माहौल में सुधार है।
अदालत ने कहा कि बातचीत अच्छी बात है लेकिन इलाके में ‘कानून व्यवस्था’ बनाकर रखनी होगी।
उसने यह भी कहा कि ‘बंदरगाह के मार्ग को अवरुद्ध करने की अनुमति नहीं है’’ और ‘‘राज्य तथा जनता को मजबूर नहीं किया जा सकता।’’
उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में आदेश दिया था कि निर्माणाधीन विझिंजम समुद्री बंदरगाह तक के मार्ग से अवरोधों को हटाना होगा।
बंदरगाह के मुख्य प्रवेश द्वार पर पिछले कुछ महीने से बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
भाषा
वैभव मनीषा
मनीषा

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