सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिलने के बाद सौतेले बेटे से दावा नहीं किया जा सकता: उच्च न्यायालय
सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिलने के बाद सौतेले बेटे से दावा नहीं किया जा सकता: उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 15 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि किसी मां को उसके सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिल रहा है, तो वह बाद में अपने सौतेले बेटे से भी गुजारा भत्ते की मांग नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला ने मंगलवार को पारित आदेश में कहा कि सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिलने के बाद मां को अपना भरण-पोषण करने में अक्षम नहीं माना जा सकता, ऐसे में वह किसी अन्य व्यक्ति से गुजारा भत्ता पाने की पात्र नहीं रह जाती।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के भरण-पोषण का दायित्व दो या अधिक व्यक्तियों पर है और वह अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो यह न्यायालय का दायित्व होगा कि वह परिस्थितियों के अनुसार तय करे कि किससे और कितनी राशि गुजारा भत्ते के रूप में दिलाई जाए।
इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने एक महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। महिला ने परिवार न्यायालय के आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करते हुए अपने सौतेले बेटे से भी गुजारा भत्ता दिलाने की प्रार्थना की थी।
परिवार न्यायालय ने महिला के सगे बेटे को प्रति माह 8,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था।
महिला का तर्क था कि अधीनस्थ अदालत ने जल्दबाजी में गुजारा भत्ते की पूरी जिम्मेदारी केवल उसके सगे बेटे पर डाल दी और सौतेले बेटे को इस दायित्व से मुक्त कर दिया।
महिला के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों बेटों को गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए था।
याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार और सौतेले बेटे की ओर से कहा गया कि जब महिला का सगा बेटा मौजूद है और उसे गुजारा भत्ता देने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, तब सौतेले बेटे को इस दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
भाषा सं राजेंद्र खारी
खारी

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