ड्रोन आधारित निगरानी के जरिये पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाए: सीएक्यूएम

Ads

ड्रोन आधारित निगरानी के जरिये पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाए: सीएक्यूएम

  •  
  • Publish Date - July 30, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 09:14 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे आगामी धान कटाई के मौसम के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करें। इसके तहत राज्यों को पराली जलाने की घटनाओं की प्रभावी निगरानी और रोकथाम के लिए ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था अपनाने को कहा गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सीएक्यूएम ने बताया है कि सैटेलाइट से पकड़ में आने से बचने के लिए देर शाम के समय पराली जलाने की खबरें मिली हैं।

सीएक्यूएम ने सुझाव दिया कि ड्रोन, पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए एक भरोसेमंद और असरदार समाधान हो सकते हैं। ये तेजी से तैनात किए जा सकते हैं, उच्च-रिजॉल्यूशन और तत्काल तस्वीरें देते हैं तथा इनके उड़ान संचालन में लचीलापन होता है, जो उपग्रह तस्वीर और जमीनी जांच में मदद करते हैं।

ड्रोन आग वाली जगहों का सटीक पता लगा सकते हैं, धुएं के गुबार की पहचान कर सकते हैं, प्रभावित खेतों का मानचित्रण कर सकते हैं और तुरंत कार्रवाई के लिए समय और तारीख दर्ज किया हुआ सबूत तैयार कर सकते हैं।

आयोग ने बताया कि ड्रोन का उपयोग पहले से ही विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा बुनियादी ढांचा निगरानी, डिजिटल हवाई सर्वेक्षण और राजमार्ग परियोजनाओं जैसे कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। उसने राज्यों को सलाह दी है कि वे पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण के लिए इस तकनीक का पूरी तरह और प्रभावी तरीके से उपयोग करें।

सीएक्यूएम ने एक बयान में कहा, ‘‘राज्यों को यह भी सलाह दी गई है कि वे पहले से ड्रोन उड़ान की योजना बनाएं, जरूरी ड्रोन उड़ानों की संख्या तय करें और प्रभावित खेतों की सही पहचान के लिए आग लगने की घटनाओं को कैडस्ट्रल (भूमि अभिलेख आधारित) नक्शों के साथ मिलान करें।’’

सीएक्यूएम ने राज्यों को की गई कार्रवाई के संबंध में 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश