नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) मणिपुर के मूल निवासी पहाड़ी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई छात्र संगठनों ने राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने के तीन साल पूरे होने पर रविवार को केंद्र सरकार और संवैधानिक प्राधिकरणों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
‘गांगटे स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन’, ‘ह्मार स्टूडेंट्स एसोसिएशन’, ‘जोउ सांगनौपांग पावलपी’ और ‘कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन’ समेत विभिन्न संगठनों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन भेजकर मौजूदा संकट पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
संगठनों ने केंद्र और कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट जैसे समूहों समेत उग्रवादी समूहों के बीच ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) फ्रेमवर्क के तहत शीघ्र राजनीतिक वार्ता की मांग की।
उन्होंने एक “स्थायी राजनीतिक समाधान” की मांग करते हुए अलग प्रशासनिक व्यवस्था पर भी विचार करने की बात कही।
तीन मई 2023 को शुरू हुई हिंसा की तीसरी बरसी पर संगठनों ने आरोप लगाया कि मूल निवासी पहाड़ी समुदायों के लोग अब भी “गंभीर मानवीय संकट” का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने बड़े पैमाने पर विस्थापन, गांवों को आग लगाए जाने और जान-माल के नुकसान का जिक्र किया।
संगठनों के अनुसार, हिंसा के दौरान 200 से अधिक गांव जला दिए गए, 250 से ज्यादा धार्मिक स्थलों को नष्ट किया गया और सैकड़ों लोगों की मौत हुई।
भाषा जोहेब सुरेश
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