Super El Nino India: भारत पर संकट के बादल! क्या फिर से धरती देखेगी जलवायु तबाही का सबसे खतरनाक दौर? ‘सुपर अल नीनो’ की वापसी से मचा हड़कंप
Super El Nino India: प्रशांत महासागर में सुपर अल नीनो बनने की आशंका जताई जा रही है। 1877 में इससे भारी तबाही हुई थी। जिसमें करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे। इसका असर भारत के मानसून, खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जिससे मौसम और फसल उत्पादन पर बड़ा खतरा बन सकता है।
(Super El Nino India/ Image Credit: Pixabay)
- प्रशांत महासागर में अल नीनो के मजबूत होने के संकेत
- 1877 में सुपर अल नीनो से हुआ था बड़ा अकाल
- 2026 में फिर भारी मौसम बदलाव की आशंका
नई दिल्ली: Super El Nino India: प्रशांत महासागर में एक बार फिर ‘अल नीनो‘ की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है। जो आगे चलकर बेहद ताकतवर रूप ले सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति दुनिया के लिए चिंता का कारण बन सकती है। साल 1877 में इसी तरह के ‘सुपर अल नीनो‘ ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी। जिसमें करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे। अब 2026 में भी ऐसे संकेत मिलने से भारत समेत पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।
1877 का ऐतिहासिक सुपर अल नीनो
1877-78 को इतिहास की सबसे विनाशकारी जलवायु घटनाओं में गिना जाता है। उस समय अल नीनो के कारण भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों में गंभीर सूखा पड़ा था। बारिश की भारी कमी से फसलें बर्बाद हो गईं और व्यापक अकाल की स्थिति बन गई थी। इस दौर को ‘ग्रेट फेमाइन’ कहा जाता है। जिसमें भुखमरी और बीमारियों से करोड़ों लोगों की जान चली गई थी।
2026 में फिर बनते हालात की आशंका
वैज्ञानिक संस्थाओं जैसे NOAA और WMO के ताजा आंकलन के अनुसार प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इससे मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो के मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। कुछ जलवायु मॉडल इसे ‘सुपर अल नीनो‘ में बदलने का संकेत दे रहे हैं। जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
भारत के मानसून और अर्थव्यवस्था पर असर
भारत में इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ सकता है। अल नीनो की स्थिति बनने पर बारिश कमजोर हो सकती है। जिससे उत्तर और मध्य भारत में सूखा और भीषण गर्मी बढ़ने का खतरा है। कृषि पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण फसलों का उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य कीमतें बढ़ने और पानी की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
आगे की स्थिति और सावधानी की जरूरत
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर अल नीनो विनाशकारी नहीं होता। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण इसकी तीव्रता बढ़ सकती है। इसलिए जल प्रबंधन, कृषि योजना और मौसम पूर्वानुमान को मजबूत करना बेहद जरूरी है। ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
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