नयी दिल्ली,29 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इस बात का संज्ञान लिया कि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आठ विधेयकों पर निर्णय ले लिया है। न्यायालय ने इसके साथ ही राज्यपाल से मुख्यमंत्री पिनराई विजयन तथा मंत्री से मुलाकात करके विधेयकों पर चर्चा करने का निर्देश दिया और उम्मीद जताई कि कोई ‘‘राजनीतिक दूरदर्शिता’’ से काम लिया जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने राज्यपाल कार्यालय की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की दलीलों पर गौर किया कि आठ विधेयकों में से सात को राष्ट्रपति के विचारार्थ ‘रिजर्व’ रखा गया है जबकि एक को खान ने मंजूरी दे दी है।
शीर्ष न्यायालय ने इस बीच राज्य सरकार को विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को समयबद्ध तरीके से मंजूरी देने या अस्वीकार करने के लिए राज्यपालों को दिशानिर्देश जारी करने संबंधी अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी।
पीठ ने कहा, ‘‘ हम रिकॉर्ड करेंगे कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री दोनों से चर्चा करेंगे…।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ उम्मीद करते हैं कि राज्य में कुछ राजनीतिक दूरदर्शिता से काम लिया जाएगा । अन्यथा हम यहां कानून बनाने के लिए और संविधान के तहत अपने कर्तव्य निभाने के लिए मौजूद हैं..। ’’
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब यह न्यायालय निर्णय ले कि कब विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रिजर्व किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल को विधेयकों को लंबित रखने नहीं दिया जा सकता क्योंकि इससे शासन बाधित होता है।
पीठ का शुरुआत में विचार था कि राज्य सरकार की याचिका का अब निपटारा किया जा सकता है क्योंकि राज्यपाल के कार्यालय ने विधेयकों पर निर्णय ले लिया है, बाद में इस मुद्दे पर दिशानिर्देश तय करने पर विचार करने के लिए इसे लंबित रखने का फैसला किया गया।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने केरल के राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव से पंजाब के मामले में उसके हालिया फैसले को देखने को कहा था। उच्चतम न्यायालय ने पंजाब के मामले में कहा था कि राज्यपाल ‘कानून बनाने की सामान्य प्रक्रिया को विफल नहीं कर सकते।’
भाषा शोभना नरेश
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