(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में भीषण शीत लहर के बीच रैन बसेरे बेघरों को सोने की जगह ही नहीं उपलब्ध करवा रहे हैं बल्कि उन्हें गर्म बिस्तर, कंबल, नियमित भोजन और बुनियादी सम्मान भी दे रहे हैं।
बेघरों को ऐसे समय में ये सब सुविधाएं मिल रही है जब सर्दी के कारण सड़कों पर जिंदा रह पाना दूभर हो रहा है।
इन लोगों के लिए ये रैन बसेरे बहुत ही राहत एवं स्थायित्व बोध लेकर आये हैं।
बारह साल के बच्चे की मां, मौसम कुमारी (45) पिछले एक महीने से एम्स के पास एक रैन बसरे में रह रही हैं।
उन्होंने कहा,‘‘हमें यहां सभी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं। हमें सैनिटरी नैपकिन, अलग कमरे और दिन में तीन बार भोजन मिलता है। एक गरीब बेघर व्यक्ति को और क्या चाहिए?’’
हालांकि, उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शौचालयों का अधिक उपयोग होने के कारण कभी-कभी समस्या उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘इतने सारे लोगों के इस्तेमाल के कारण वे जल्द गंदे हो जाते हैं।’’
एम्स के पास स्थित रैन बसेरे में रह रहे 52 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर रमेश ने भी कुछ इसी तरह की भावनाएं व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले मैं बस स्टैंड के पास सोता था । ठंड असहनीय होती थी। यहां कम से कम हमें कंबल और खाना तो मिल जाता है। बस एक ही समस्या है कि बहुत ठंडी रातों में जब ज्यादा लोग आ जाते हैं तो जगह कम पड़ जाती है।’’
हाल में अपने दो बच्चों के साथ रैन बसरे में रहने आयी सुनीता (38) ने कहा कि इस व्यवस्था ने सर्दियों को कम भयावह बना दिया है।
सुनीता ने कहा, ‘‘ मेरे बच्चे यहां चैन से सो सकते हैं। खाना सादा है लेकिन पेट भर जाता है। कभी-कभी खाना का लंबा इंतज़ार करना पड़ता है, लेकिन हम समझते हैं कि यहां बहुत सारे लोग हैं।’’
बुजुर्ग मोहन लाल (67) ने कहा कि इस रैन बसेरे ने उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस उम्र में बाहर सोना बहुत बीमार कर सकता है। यहां मुझे स्वास्थ्य जांच भी मिल जाती है।’’
सराय काले खान स्थित रैन बसेरे का देखभाल करने वाले विकास ने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की गई है कि कोई भी व्यक्ति ठंड में बेघर न रह जाए।
उनके अनुसार, रैन बसरे में कंबलों का पर्याप्त भंडार है। विकास ने कहा, ‘‘अगर किसी को एक से अधिक कंबल, यहां तक कि चार तक की भी जरूरत होती है, तो हम उसे उपलब्ध कराते हैं।’’
सराय काले खान रैन बसरे में हर रात कम से कम 60 लोग ठहरते हैं, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए अलग कमरे आरक्षित किए गए हैं।
एम्स के पास रैन बसेरे का देखभाल करने वाले वेदपाल सिंह ने कहा कि भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए, राज्य सरकार द्वारा तैनात बचाव वाहन लोगों को पास के अन्य रैन बसेरों में ले मदद करते हैं, ताकि किसी को भी ठंड में बाहर न सोना पड़े।
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग सफाई और रखरखाव के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरत रहा है।
भाषा राजकुमार रंजन
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