फर्जी जमानतदारों से जमानत लेने वाले विदेशी आरोपियों पर उच्चतम न्यायालय सख्त

Ads

फर्जी जमानतदारों से जमानत लेने वाले विदेशी आरोपियों पर उच्चतम न्यायालय सख्त

  •  
  • Publish Date - August 17, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 08:32 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने स्वापक औषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में फर्जी जमानतदारों के सहारे जमानत हासिल करने वाले विदेशी आरोपियों पर चिंता जताते हुए सोमवार को कई कड़े निर्देश जारी किए।

न्यायालय ने विदेशी आरोपियों के पासपोर्ट संबंधित अदालत में जमा कराने, उनकी विदेश यात्रा पर रोक लगाने और भारत में उनकी आय या धन के स्रोत की जानकारी देने जैसे निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ये दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि जब जमानतदार फर्जी, गलत या अस्तित्वहीन पाए जाते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास कमजोर होता है।

एनडीपीएस मामलों में अधिकृत जमानत एजेंट की व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर गहन विचार की आवश्यकता है और इस संबंध में निर्णय लेने का दायित्व कार्यपालिका पर छोड़ दिया।

एनडीपीएस के एक मामले में विदेशी नागरिक चिदिबेरे किंग्सले नवचरा के जमानत पर रिहा होने के बाद फरार होने की घटना की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, “विदेशी आरोपी का पासपोर्ट संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में जमा कराया जाए। अदालत पूर्व अनुमति के बिना आरोपी के देश से बाहर जाने पर भी रोक लगा सकती है।”

न्यायालय ने कहा, “जमानत पर रिहा आरोपी रिहाई के एक सप्ताह के भीतर विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) में अपना पंजीकरण कराए। वह जांच अधिकारी और संबंधित अदालत को भी इस पंजीकरण की लिखित सूचना दे।”

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि जमानत पाने के लिए विदेशी आरोपी को अनिवार्य रूप से समान राशि के दो जमानतदार पेश करने होंगे।

पीठ ने स्पष्ट किया, “यदि संबंधित अदालत को लगता है कि पर्याप्त प्रयासों के बावजूद दो जमानतदार जुटाना कठिन या असंभव हो गया है, तो वह कारण दर्ज करते हुए लिखित आदेश के जरिए इस शर्त में छूट दे सकती है।”

पीठ ने कहा, “सभी मामलों में जमानतदारों के सत्यापन की प्रक्रिया तीन दिन के भीतर पूरी की जाए और आरोपी की रिहाई से पहले सत्यापन रिपोर्ट अधीनस्थ अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए। यदि इस समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो इसके कारण दर्ज कर संबंधित अदालत के संज्ञान में लाया जाए।”

पीठ ने कहा, “विदेशी आरोपी संबंधित अदालत के समक्ष एक हलफनामा दाखिल करेगा, जिसमें भारत में उसकी आय या धन के स्रोत का विवरण होगा। वह देश में अपने सभी बैंक खातों का विवरण भी देगा, यदि कोई खाता है। संबंधित जांच अधिकारी लिखित रूप से आरोपी के मूल देश के दूतावास को कथित अपराध में उसकी संलिप्तता की जानकारी देगा।”

अदालत ने कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को एक केंद्रीकृत आंकड़ा-संग्रह तैयार करने का भी निर्देश दिया। इसमें एनडीपीएस मामलों में आरोपी विदेशी नागरिकों और उनके जमानतदारों से संबंधित सभी विवरण दर्ज किए जाएंगे।

पीठ ने कहा, “यदि सत्यापित किए गए जमानतदार बाद में फर्जी पाए जाते हैं, तो सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों—पुलिस, अदालत के कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों को कर्तव्य में लापरवाही के लिए विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा।”

गृह मंत्रालय और राज्यों के संबंधित विभाग दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी करेंगे।

भाषा खारी नरेश

नरेश