नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बिना मंजूरी के हुए निर्माण और हाल में दिल्ली एवं लखनऊ में आग लगने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बृहस्पतिवार को नगर निकायों को फटकार लगाई और कहा कि उसके निर्देशों का पालन न करने पर शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने दिल्ली नगर निगम और गुरुग्राम एवं लखनऊ के नगर निकायों के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि वह अधिकारियों के व्यवहार और समय-समय पर दिए गए निर्देशों का पालन न करने से क्षुब्ध है।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि 20 मई को दिए गए उसके आदेश के बावजूद अवैध ढांचों को सील करने, ध्वस्त करने या कानून के तहत आवश्यक अन्य कार्रवाई के संबंध में जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निकायों की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने इस मामले में ‘न्यायमित्र’ नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा द्वारा दिल्ली और लखनऊ में हाल की अग्नि सुरक्षा रणनीतियों तथा अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर दाखिल स्थिति रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया।
शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जो भी नगर निकाय उसके पूर्व के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि तीन जून को दिल्ली के मालवीय नगर और 22 जून को लखनऊ में हुईं आग की घटनाएं किसी एक विफलता का नतीजा नहीं थीं, बल्कि कई खामियों के एक साथ सामने आने से ये हादसे हुए।
उन्होंने कहा कि तीन जून को दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित घनी आबादी वाले हौज रानी क्षेत्र में एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस इमारत का संचालन ‘स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट’ के रूप में हो रहा था, जिसमें भूतल पर एक रेस्तरां भी था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस हादसे में मृतकों की अंतिम संख्या 23 तक पहुंच गई। इनमें से ज्यादातर विदेशी नागरिक थे, जो नाइजीरिया, मोजाम्बिक, सोमालिया, लाइबेरिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से थे। ये लोग अपने रिश्तेदारों के इलाज के लिए मैक्स और पीएसआरआई अस्पतालों के पास ठहरे हुए थे। इसके अलावा 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया गया।’’
सिन्हा ने कहा कि 22 जून को लखनऊ के अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से ज्यादातर 16 से 25 वर्ष की आयु के युवा छात्र थे। इस हादसे में कई पालतू जानवरों की भी मौत हुई और कई घायल हुए।
पीठ ने अपने पूर्व के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने यहां भीड़भाड़ वाले लाजपत नगर और सरोजिनी नगर इलाकों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।
पीठ ने नगर निगम की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसडी संजय से कहा, ‘‘हम विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के उस रवैये को लेकर चिंतित हैं, जिसमें उसने वर्ष 2024 में अदालत द्वारा जारी निर्देशों और 20 मई को दिए गए स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया। इन निर्देशों में यह बताया गया था कि अधिकारियों को क्या-क्या कदम उठाने आवश्यक हैं।’’
एएसजी ने अदालत को बताया कि कुछ काम किया गया है। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख चार अगस्त से पहले एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
हालांकि, पीठ इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और चेतावनी दी कि यदि संबंधित अधिकारी जमीन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करते हैं तो नगर निकायों के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से इसके परिणाम भुगतने होंगे।
सिन्हा ने न्यायालय को बताया कि अनधिकृत ढांचों और भवन उपनियमों का उल्लंघन करने वाले ढांचे को दो सप्ताह के भीतर ध्वस्त किया जाना था, लेकिन उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी करने के अलावा कोई आगे की कार्रवाई नहीं की गई।
पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में, जब वर्ष 2024 और 20 मई को जारी निर्देशों के अनुपालन में कोई कार्रवाई नहीं की गई, (तो) हमारा विचार है कि इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया जाना चाहिए और एमसीडी के अधिकारियों को अदालत में तलब किया जाना चाहिए।’’
शीर्ष अदालत ने लाजपत नगर और सरोजिनी नगर इलाकों में अनधिकृत निर्माण के जमीनी सर्वेक्षण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के प्रोफेसर और एमसीडी अधिकारियों की एक समिति गठित करते हुए कहा कि कानून का शासन सुनिश्चित करने और व्यापक जनहित में कुछ विशेष निवारक तथा तत्काल कदम उठाए जाने जरूरी हैं।
पीठ ने कहा कि वह एमसीडी की मंशा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, लेकिन इस मामले में कोई अंतिम फैसला लेने से पहले वह अधिकारियों को उसके निर्देशों का पालन करने के लिए एक आखिरी मौका दे रही है।
पीठ ने हाल की मीडिया की खबरों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि गुरुग्राम में 93 प्रतिशत इमारतें अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने में विफल रही हैं। अदालत ने शहर के नगर निकाय के कार्यकारी प्रमुख को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और की जा रही कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
भाषा आशीष सुरेश
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