उच्चतम न्यायालय सोनम वांगचुक के भाषणों के वीडियो देखेगा

उच्चतम न्यायालय सोनम वांगचुक के भाषणों के वीडियो देखेगा

उच्चतम न्यायालय सोनम वांगचुक के भाषणों के वीडियो देखेगा
Modified Date: March 10, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: March 10, 2026 10:09 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भाषणों के वीडियो इस सप्ताह देखेगा और उनकी पत्नी गीतांजलि जे एंग्मो द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर 17 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने कहा कि न्यायाधीश इस बृहस्पतिवार को वीडियो देखेंगे और उन्होंने रजिस्ट्रार से स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने को कहा।

न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, ‘न्यायाधीश बृहस्पतिवार को वीडियो देखेंगे। पहले हम अलग-अलग वीडियो देखेंगे और फिर दोनों न्यायाधीश एक साथ वीडियो देखेंगे।’

केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अस्वस्थ हैं और उन्होंने मामले में सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया है।

एंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले में बार-बार स्थगन से देश में ‘गलत संदेश’ जा रहा है।

पीठ ने कहा कि वह मामले को अगले मंगलवार (17 मार्च) को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर रही है और यह स्पष्ट कर दिया कि उस दिन जो भी हो, अदालत अपना फैसला सुरक्षित रखेगी।

न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, ‘‘हम यह बिल्कुल स्पष्ट कर रहे हैं कि चाहे कुछ भी हो, हम अंतिम सुनवाई के बाद अगले मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रखेंगे। हम किसी भी नये बिंदु पर बहस की अनुमति नहीं देंगे और सॉलिसिटर जनरल, केवल सिब्बल द्वारा अपने जवाबी तर्क में उठाए गए नये बिंदुओं पर बहस कर सकते हैं।’’

इससे पहले मेहता ने पीठ द्वारा वांगचुक के भाषणों के अनुवाद को लेकर उठाए गए मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने की कोशिश की थी।

शीर्ष अदालत ने 26 फरवरी को एंग्मो की याचिका पर सुनवाई होली की छुट्टियों के बाद के लिए टाल दी थी।

इससे पहले भी मामले को कई बार स्थगित किया गया था, क्योंकि विभिन्न पक्षों के वकील उपलब्ध नहीं थे।

नटराज ने कहा था कि वांगचुक पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार थे, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 161 लोग घायल हुए थे।

केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने शीर्ष अदालत को बताया था कि वांगचुक को सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को भड़काने के लिए हिरासत में लिया गया था।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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