Supreme Court Historic Decision || Image- ANI File
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि हिंदू कानून के तहत यदि कोई महिला अपने ससुर की मृत्यु के बाद विधवा होती है, तब भी वह उसकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है। (Supreme Court Historic Decision) न्यायमूर्ति पंकज मिथल और एसवीएन भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA), 1956 के अंतर्गत महिला को ‘आश्रित’ मानने के लिए पति की मृत्यु का समय-चाहे वह ससुर की मृत्यु से पहले हो या बाद में-अप्रासंगिक है।
फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मिथल ने कहा कि मृत हिंदू के सभी उत्तराधिकारी उसकी संपत्ति से प्राप्त धन या संपत्ति से उसके आश्रितों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 21(सात) के तहत ‘मृत हिंदू के पुत्र की विधवा’ आश्रित की श्रेणी में आती है और धारा 22 के अंतर्गत भरण-पोषण का दावा करने की अधिकारिणी है।
न्यायालय ने कहा कि पुत्र या अन्य कानूनी वारिस विरासत में मिली संपत्ति से उन सभी आश्रित व्यक्तियों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं, जिनका भरण-पोषण करना मृत व्यक्ति का कानूनी और नैतिक दायित्व था। (Supreme Court Historic Decision) अतः यदि पुत्र की मृत्यु के बाद विधवा पुत्रवधू स्वयं या मृत पुत्र की छोड़ी गई संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो ससुर का कर्तव्य है कि वह उसका भरण-पोषण करे।
यह मामला दिवंगत महेंद्र प्रसाद की संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद से उत्पन्न हुआ। महेंद्र प्रसाद का दिसंबर 2021 में निधन हुआ, जबकि उनके पुत्र रणजीत शर्मा का मार्च 2023 में देहांत हो गया। रणजीत की विधवा गीता शर्मा ने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण के लिए परिवार न्यायालय में अर्जी दी थी, जिसे पहले यह कहकर खारिज कर दिया गया कि वह ससुर की मृत्यु के समय विधवा नहीं थी। बाद में उच्च न्यायालय ने यह फैसला पलट दिया, जिसके खिलाफ परिजनों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी।