1993 मुंबई बम धमाका मामले में टाडा की सेशंस कोर्ट ने अबु सलेम को दोषी करार दिया है. इसके साथ ही मुस्तफा दौसा और उसके भाई मोहम्मद दौसा को भी दोषी करार दिया गया है. 24 साल बाद ये फैसला आया है.
12 मार्च 1993 को इस दिन मुंबई में एक के बाद एक 13 बम धमाके हुए थे. इस बम धमाके में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इनमें से एक, बॉम्बे स्टॉक एक्सेंज की 28-मंज़िला इमारत की बेसमेंट में दोपहर 1.30 बजे धमाका हुआ जिसमें लगभग 50 लोग मारे गए थे. इसके आधे घंटे बाद एक कार धमाका हुआ और अगले दो घंटे से कम समय में कुल 12 धमाके हो चुके थे. बताया जाता है कि धमाकों में 27 करोड़ रुपये संपत्ति नष्ट हुई थी. इस मामले में 129 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था.
-अबू सलेम- आपराधिक साजिश का दोषी करार, साजिश और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ।
-मुस्तफा दौसा- षड़यंत्र, हत्या और आतंकी गतिविधियों के लिए दोषी करार। 2008 में दुबई से प्रत्यर्पण हुआ था। धमाके की साजिश और हथियार सप्लाई करने के लिए दोषी करार।
-फिरोज अब्दुल राशिद खान- हत्या का दोषी करार, फिरोज पर दुबई में मीटिंग में शामिल होने का आरोप था।
-ताहिर मर्चेंट को भी टाडा अदालत ने दोषी माना है।
-अब्दुल कय्यूम को अदालत ने सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। और उसे निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
-रियाज सिद्दीकी को भी टाडा अदालत ने दोषी माना। लेकिन साजिश के आरोप को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा।
24 साल बाद धमाकों के पीड़ितों के जख्दाम पर टाडा अदालत ने मरहम लगाने का काम किया। अदालत ने अबू सलेम समेत 6 आरोपियों को दोषी माना जबकि अब्दुल कय्यूम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।