तमिलनाडु : 100 करोड़ रुपये की पलानी मंदिर भूमि धोखाधड़ी मामले में चार लोग गिरफ्तार

तमिलनाडु : 100 करोड़ रुपये की पलानी मंदिर भूमि धोखाधड़ी मामले में चार लोग गिरफ्तार

तमिलनाडु : 100 करोड़ रुपये की पलानी मंदिर भूमि धोखाधड़ी मामले में चार लोग गिरफ्तार
Modified Date: July 29, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: July 29, 2026 8:14 pm IST

डिंडीगुल (तमिलनाडु), 29 जुलाई (भाषा) डिंडीगुल जिले में स्थित प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर से जुड़े एक मठ की बेशकीमती जमीन कथित तौर पर फर्जी विलेख पत्र तैयार कर निजी लोगों के नाम करने के मामले की जांच कर रही तमिलनाडु सीबी-सीआईडी ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

यहां की एक अदालत ने इन लोगों को 12 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इन गिरफ्तारियों से मंदिर के नजदीक 1.4 एकड़ जमीन के चर्चित मामले में एक बड़ी कामयाबी मिली है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तिरुपुर के वेल्लाईथुरई (60), डिंडीगुल के अनवरदीन (65), विल्लुपुरम जिले के मुरुगादास (56) और पलानी के सेतुपति के तौर पर की गई है।

पूछताछ सीबी-सीआईडी की पुलिस अधीक्षक (एसपी) शाजिता की प्रत्यक्ष निगरानी में की गई।

इस बीच, पुलिस एक अन्य प्रमुख आरोपी जयप्रकाश की सक्रिय रूप से तलाश कर रही है जो ओड्डनछत्रम का रहने वाला भूमि दलाल है तथा फिलहाल फरार है।

चारों लोगों को पुलिस सुरक्षा के बीच डिंडीगुल सीबी-सीआईडी कार्यालय से अदालत ले जाया गया। अदालत ने चारों आरोपियों को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पलानी मंदिर भूमि विभाग के अधीक्षक मुरुगनंदम की तहरीर पर पलानी आदिवरम पुलिस थाने में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। नामजद आरोपियों में पलानी के संयुक्त उप पंजीयक जस्टिन मणिकंडन, मंदिर न्यास के सदस्य मुरुगादास, तिरुपुर के वेल्लाईथुरई (जिन्होंने जमीन खरीदी थी) और पलानी पुदुर के सेतुपति शामिल हैं। इनके खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत पांच धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन का इस्तेमाल श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पार्किंग सेवा मुहैया कराने के लिए किया जा रहा है और इसकी बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि इस महीने की शुरुआत में यह केवल दो करोड़ रुपये में निजी लोगों के नाम पंजीकृत कर दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि 1888 के एक स्थायी बंदोबस्ती विलेख के तहत यह जमीन केवल धार्मिक और परमार्थ कार्यों के लिए समर्पित थी और इसकी किसी भी तरह की व्यावसायिक बिक्री या हस्तांतरण पर रोक थी। इसके बावजूद छह जुलाई को यह जमीन निजी लोगों के नाम पंजीकृत कर दी गई। इस पंजीकरण के दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग की स्पष्ट और लिखित आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया गया।

राज्य सरकार ने इससे पहले गैरकानूनी तरीके से भूखंड पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पलानी के संयुक्त उप पंजीयक जस्टिन मणिकंडन और जिला पंजीयक शशिकला को निलंबित कर दिया था।

मणिकंडन को मद्रास उच्च न्यायालय से इस मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत मिली है और हाल में उनसे अपराध शाखा- अपराध अन्वेषण विभाग (सीबी-सीआईडी) ने सात घंटे तक पूछताछ की थी। सीबी-सीआईडी को 15 जुलाई को मामले की जांच सौपी गई थी और इस मामले में अब तक कई अधिकारियों सहित 80 लोगों से पूछताछ की गई है।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ पहले ही विवादित बिक्री विलेख को अमान्य घोषित कर चुकी है।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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