रांची, 15 जुलाई (भाषा) झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को कहा कि दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र बदलाव के दौर से गुजर रही है, ऐसे में तकनीकी संस्थानों को नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप और उद्यमिता के मजबूत केंद्रों के रूप में उभरने का प्रयास करना चाहिए।
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के 72वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए गंगवार ने कहा कि देश के युवाओं को नयी प्रौद्योगिकियों का निर्माता और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना चाहिए।
उन्होंने कहा, “दुनिया एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, हरित ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में तीव्र बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे दौर में तकनीकी संस्थानों की भूमिका सिर्फ ज्ञान देने तक ही सीमित नहीं रह सकती। इसके बजाय, उन्हें नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक चुनौतियों का समाधान विकसित करने वाले मजबूत केंद्रों के तौर पर काम करना चाहिए।”
गंगवार ने कहा कि देश ‘विकसित भारत-2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘इंडिया एआई मिशन’ जैसी दूरदर्शी पहलों के जरिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नयी ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत के युवाओं को नयी प्रौद्योगिकियों का सिर्फ उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें इनके निर्माता और वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरना चाहिए।”
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध है। उन्होंने कहा कि खनन, इस्पात, ऊर्जा, कृषि, वानिकी, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार के बहुत सारे अवसर हैं।
गंगवार ने उम्मीद जताई कि बीआईटी मेसरा अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल करके राज्य की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से समाधान विकसित करने और समाज की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने में अहम भूमिका निभाएगा।
बीआईटी मेसरा ने अपने स्थापना दिवस के मौके पर संस्थान की अत्याधुनिक कंप्यूटिंग और अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए एनवीआईडीआईए-आधारित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।
यह केंद्र उच्च क्षमता वाले जीपीयू (ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट) आधारित कंप्यूटिंग ढांचे तक पहुंच उपलब्ध कराएगा और एआई, डेटा विज्ञान, रोबोटिक्स, वीएलएसआई, दवा खोज, सटीक कृषि, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी और अन्य उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के अलावा उद्योगों के साथ सहयोग को बढ़ावा देगा।
भाषा पारुल सुरेश
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