कांग्रेस का बस्तर में बाघों के शिकार, वन्यजीव तस्करी का दावा, सरकार ने आरोप खारिज किये

Ads

कांग्रेस का बस्तर में बाघों के शिकार, वन्यजीव तस्करी का दावा, सरकार ने आरोप खारिज किये

  •  
  • Publish Date - July 15, 2026 / 05:47 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 05:47 PM IST

रायपुर, 15 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि बस्तर क्षेत्र को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त घोषित किए जाने के बाद वहां वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इस आरोप को खारिज किया।

सरकार ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 से अब तक राज्य में बाघों के शिकार या तस्करी के पांच मामले सामने आए हैं, जिनमें छह बाघों की खाल बरामद की गई और 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत तथा कांग्रेस विधायकों शेषराज हरबंश और विक्रम मंडावी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से बीजापुर जिले के इंद्रावती बाघ अभयारण्य में कथित बाघ शिकार का मुद्दा उठाया।

उन्होंने दावा किया कि करीब पांच महीने पहले तीन बाघों और हाल में दो अन्य बाघों का शिकार किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हालिया कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार करके दो बाघों की खाल बरामद की है।

कांग्रेस विधायकों ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तार व्यक्तियों में महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े ऐसे कर्मी भी शामिल हैं, जिनकी तैनाती छत्तीसगढ़ सीमा के पास थी।

विपक्ष के अनुसार, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने मई में राज्य के वन मुख्यालय को उन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ाने की सलाह दी थी, जहां बाघों और तेंदुओं की आवाजाही होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चेतावनी के बावजूद विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि बाघ संरक्षण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन बाघों की खाल और अंगों की तस्करी तथा शिकार जारी है, जिससे लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है।

चार दशक से अधिक समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र को केंद्र द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुरूप 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किया गया था।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने जवाब में बस्तर में ‘‘वामपंथी उग्रवाद’’ समाप्त होने के बाद वन्यजीव तस्करों के सक्रिय होने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने पांच महीने पहले इंद्रावती बाघ अभयारण्य में तीन बाघों के शिकार के दावे को भी खारिज किया।

कश्यप ने सदन को बताया कि इस वर्ष 17 मार्च को दंतेवाड़ा वन मंडल में एक बाघ की खाल बरामद होने के बाद वन्यजीव अपराध का एक मामला दर्ज किया गया था।

उन्होंने कहा कि आरोपियों के बयान के आधार पर आशंका है कि बाघ का शिकार इंद्रावती बाघ अभयारण्य के भीतर किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामला अदालत में विचाराधीन है।

मंत्री के अनुसार, 29 जून को एक संयुक्त शिकार-रोधी अभियान के दौरान कांकेर जिले में बांदे-पखांजूर मार्ग पर दो लोगों को दो बाघों की खाल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से छत्तीसगढ़ लाते समय पकड़ा गया।

उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान गढ़चिरौली निवासियों बियेश्वर गेडाम और बाबूराव मडावी के रूप में हुई है तथा उनके पास से दो बाघों की खाल, 13 मूंछ और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।

कश्यप ने कहा कि पूछताछ में पता चला कि गेडाम ‘‘महाराष्ट्र पुलिस की गढ़चिरौली विशेष शाखा की खुफिया इकाई में कांस्टेबल है, जबकि मडावी पुलिस का मुखबिर था।’’

उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने गेडाम को निलंबित कर दिया है और मडावी को मुखबिर के रूप में हटा दिया है।

मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर तलाशी अभियान के दौरान बाद में इंद्रावती नदी के पास छिपाकर रखी गई तीसरे बाघ की खाल भी बरामद की गई। उन्होंने कहा कि इसके अलावा नेतिवाड़ा गांव में आरोपियों के घरों से फंदे, चाकू, 12 नख और चार दांत भी जब्त किए गए।

उन्होंने बताया कि बरामद वन्यजीव अवशेषों की आनुवंशिक और भौगोलिक उत्पत्ति का पता लगाने के लिए नमूने डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजे गए हैं।

कश्यप ने कहा कि छह जुलाई को सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जबकि लापरवाही के आरोप में तीन वन कर्मियों को निलंबित किया गया है।

उन्होंने स्वीकार किया कि डब्ल्यूसीसीबी ने मई में वन विभाग, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में सतर्क रहने संबंधी सामान्य परामर्श जारी किया था, लेकिन इंद्रावती बाघ अभयारण्य में बाघों के शिकार या तस्करी के संबंध में कोई विशेष चेतावनी नहीं दी थी।

कांग्रेस के इस आरोप को खारिज करते हुए कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सात-आठ बाघों का शिकार हुआ है, कश्यप ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक बाघों के शिकार या तस्करी के पांच मामलों का पता चला है, जिनमें छह बाघों की खाल बरामद की गई और 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि जंगलों में फंदा-रोधी अभियान चलाया जा रहा है तथा दोषियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के पूरक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के आकलन के अनुसार इंद्रावती बाघ अभयारण्य में आधिकारिक रूप से पांच बाघों की पुष्टि हुई थी।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग मामलों में छह बाघों की खाल बरामद हुई हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि वे सभी इंद्रावती बाघ अभयारण्य के बाघों की ही हैं। उन्होंने बताया कि बाघ अभयारण्य का वार्षिक बजट लगभग 10 करोड़ रुपये है।

भाषा अमित नरेश

नरेश