हैदराबाद, 29 मार्च (भाषा) तेलंगाना विधानसभा ने रविवार को वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘तेलंगाना कर्मचारी जवाबदेही और माता-पिता सहायता निगरानी विधेयक, 2026’ पारित किया।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि देश में पहले से ही एक राष्ट्रीय कानून – माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 मौजूद है।
हालांकि, राज्य के नए विधेयक में जन प्रतिनिधियों और निजी कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा।
इस विधेयक के अनुसार, जन प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी कर्मचारियों के लिए अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना अनिवार्य है। अनुपालन न करने पर वेतन का 15 प्रतिशत या 10,000 रुपये, जो भी कम हो, माता-पिता को देय राशि के रूप में कटौती की जाएगी।
चर्चा के दौरान रेड्डी ने विजयपत सिंघानिया का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपनी पूरी संपत्ति अपने बेटे के नाम कर दी थी, लेकिन बाद में उन्हें बेदखल कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए यह विधेयक पेश किया है। यह किसी अन्य कानून जैसा नहीं है। लोगों में नैतिक मूल्यों का संचार करना इसका मकसद है, यदि कोई अपने माता-पिता की उपेक्षा करता है, तो उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे उनकी देखभाल करें।’’
भाजपा समेत अन्य दलों ने भी इस विधेयक का समर्थन किया है।
भाषा शफीक रंजन
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