आतंक वित्त-पोषण मामला: न्यायालय ने शब्बीर शाह पर लगाईं कठोर शर्तें

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आतंक वित्त-पोषण मामला: न्यायालय ने शब्बीर शाह पर लगाईं कठोर शर्तें

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  • Publish Date - March 17, 2026 / 08:07 PM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 08:07 PM IST

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आतंकवाद के वित्त-पोषण मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को जमानत पर रिहाई का आदेश देते वक्त कुछ कठोर शर्तें भी लगाईं, जिनमें केवल एक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, इसे हमेशा चालू रखना, निचली अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली छोड़ने से परहेज़ करना और इस मामले के बारे में मीडिया में कोई टिप्पणी न करना शामिल है।

न्यायालय ने शाह से यह भी कहा कि मामले की सुनवाई की अवधि के दौरान लगातार उपयोग कर सकने वाले अपने मोबाइल और/या लैंडलाइन नंबर की जानकारी विशेष सार्वजनिक अभियोजक (एसपीपी) के साथ साझा करें।

शीर्ष अदालत ने शाह की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि यदि मुकदमा समय पर समाप्त होने की संभावना न हो तो निरंतर हिरासत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का कारण बन सकती है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 12 मार्च के अपने आदेश में कहा कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है और 74-वर्षीय शाह लंबी अवधि से हिरासत में रहे हैं।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने शाह को चार जून 2019 को गिरफ्तार किया था।

पीठ ने कहा, ‘‘शाह आठ साल से अधिक समय तक कारावास में रहे हैं। किसी आरोपी की लंबी हिरासत, विशेषकर ऐसी परिस्थितियों में जहां मुकदमे में बहुत कम या कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई हो, जमानत के मामले में निर्णय लेने में एक महत्वपूर्ण कारक है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना और यह देखते हुए कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है तथा अपीलकर्ता की लंबी हिरासत अवधि और उनकी वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए, हम अपीलकर्ता को मुकदमे के लंबित रहने के दौरान जमानत देने के इच्छुक हैं।’’

हालांकि पीठ ने शाह पर कड़ी जमानत शर्तें भी लागू की हैं, जो निचली अदालत द्वारा लगायी जाने वाली शर्तों से भिन्न हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘वह निचली अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। यदि उनके (शाह के) पास पासपोर्ट है, तो वह उसे निचली अदालत के समक्ष जमा कर दें।’

पीठ ने उन्हें निर्देश दिया कि वे हर पखवाड़े राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के जांच अधिकारी के पास बुधवार या बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच रिपोर्ट करें।

शीर्ष अदालत ने कहा कि शाह न तो किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे।

इसने कहा, ‘‘शाह निचली अदालत के समक्ष एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि जमानत पर रहते हुए वह समान प्रकृति का कोई और अपराध नहीं करेंगे और वर्तमान मामले में अपनी भूमिका के बारे में मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’’

आदेश में कहा गया कि यदि शाह ने किसी भी जमानत शर्त का उल्लंघन किया, तो अभियोजन पक्ष उन्हें मिली राहत रद्द करने का अनुरोध कर सकता है।

पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता अपनी रिहाई के तीन दिनों के भीतर निचली अदालत के समक्ष उपरोक्त शर्तों और निचली अदालत द्वारा लगाई जा सकने वाली अतिरिक्त शर्तों का पालन करने का वचन (अंडरटेकिंग) देंगे।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि शाह निचली अदालत द्वारा निर्देशित जमानती बॉण्ड जमा कराएंगे, जिसके बाद उन्हें हिरासत से रिहा किया जाएगा।

पीठ ने यह आदेश शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद पारित किया। एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा पेश हुए।

पीठ ने सुनवाई के दौरान मुकदमे में कई विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया और शाह की लंबी हिरासत को भी रेखांकित किया।

भाषा सुरेश रंजन

रंजन