नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) वर्ष 1981 से 2010 तक की जलवायु संबंधी आधारभूत स्थिति की तुलना में, भारत में अगले दो दशकों में तीव्र जलवायु परिवर्तन के कारण प्रत्येक वर्ष 15 से 40 अतिरिक्त गर्म दिन देखने को मिल सकते हैं। यह पूर्वानुमान कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित जलवायु सूचना मंच ने व्यक्त किया है।
‘क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विजुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम’ (क्रेविस) नामक एआई मंच की शुरुआत बुधवार को की गई, जो दिल्ली आधारित जलवायु थिंक टैंक ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर’ (सीईईडब्ल्यू) द्वारा विकसित किया गया है।
क्रेविस के अनुसार, देश के कई क्षेत्रों में सालाना 20 से 40 गर्म रातों की वृद्धि देखी जा सकती है।
इसके अलावा, अगले दो दशकों में भारी वर्षा की घटनाओं में लगातार वृद्धि होने का अनुमान है। कई जिलों में प्रतिवर्ष भारी वर्षा वाले 10 से 30 अतिरिक्त दिन देखने को मिल सकते हैं।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे मध्य एवं दक्षिणी राज्यों में बारिश और गर्म दिनों दोनों में अधिक वृद्धि होने की संभावना है।
क्रेविस ने संबंधित अनुमान पिछले 40 वर्षों के ऐतिहासिक जलवायु आंकड़ों को मिलाकर लगाया है, और यह 2030-50 तथा 2051-70 तक के अनुमान प्रदान कर सकता है।
यह मंच 279 संकेतकों के आधार पर जिला, ग्रिड और राज्य स्तर पर जलवायु डेटा भी प्रदान करता है, जिसे तापमान, वर्षा और आर्द्रता सहित 20 से अधिक विश्लेषण-अनुकूल मापदंडों में संक्षेपित किया गया है।
सीईईडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणाभ घोष ने कहा, ‘‘क्रेविस को जलवायु संबंधी जानकारी को मॉडल से निकालकर शासन के सभी स्तरों पर निर्णय लेने वालों तक पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह भारत में जिलों से लेकर बाजारों तक और अंततः ‘ग्लोबल साउथ’ में विभिन्न क्षेत्रों और पैमानों पर दैनिक योजना एवं प्रतिक्रिया प्रणालियों में उपयोगी, विश्वसनीय और अंतर्निहित हो सके।’’
भाषा
नेत्रपाल संतोष
संतोष