अजमेर शरीफ दरगाह में स्वास्तिक होने का दावा, हिंदू संगठन के बयान पर खादिम कमेटी ने कही ये बड़ी बात

swastika in Ajmer Sharif Dargah :  ज्ञानवापी मस्जिद, शाही ईदगाह, ताजमहल और क़ुतुब मीनार पर चल रहे विवाद के बीच अब अजमेर शरीफ दरगाह में भी

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  • Publish Date - May 27, 2022 / 03:20 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:15 PM IST

नई दिल्ली। swastika in Ajmer Sharif Dargah :  ज्ञानवापी मस्जिद, शाही ईदगाह, ताजमहल और क़ुतुब मीनार पर चल रहे विवाद के बीच अब अजमेर शरीफ दरगाह में भी मंदिर होने की बात कही जा रही है। हिंदूवादी संगठन महाराणा प्रताप सेना के राजवर्धन सिंह परमार ने कहा है कि अजमेर स्थित हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के पूर्व में मंदिर है। उन्होंने कहा कि दरगाह की दीवारों व खिडकियों में हिन्दू धर्म से संबंधित चिह्नों के आधार पर जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से सर्वे की मांग की है, वहीं दरगाह की खादिमों की कमेटी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।>>*IBC24 News Channel के WhatsApp  ग्रुप से जुड़ने के लिए Click करें*<<

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खादिम कमेटी ने कहा दरगाह में नहीं है स्वस्तिक का चिह्न

swastika in Ajmer Sharif Dargah :  खादिम कमेटी अंजुमन सैयद जादगान के अध्यक्ष मोईन चिश्ती ने कहा कि यह दावा निराधार है, क्योंकि दरगाह में इस तरह के चिह्न नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों समाज हिन्दू और मुस्लिम के करोड़ों लोग दरगाह में आते हैं। उन्होंने कहा कि ”मैं पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि दरगाह में कहीं भी स्वास्तिक चिह्न नहीं है। दरगाह 850 सालों से है। इस तरह का कोई प्रश्न आज तक उठा ही नहीं हैं। आज देश में एक विशेष तरह का माहौल है जो पहले कभी नहीं था।’

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सरकार का काम है जवाब देना : चिश्ती

swastika in Ajmer Sharif Dargah :  चिश्ती ने कहा कि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सवाल उठाने का मतलब उन करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है, जो अपने-अपने धर्म को मानने वाले हैं और यहां आते हैं। चिश्ती ने कहा कि ऐसे सभी तत्वों को जवाब देना सरकार का काम है। कमेटी के सचिव वाहिद हुसैन चिश्ती ने कहा कि यह सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश है।