न्यायालय ने यूएई की अदालत के आदेश से जुड़ी याचिका पर जुलाई में सुनवाई पर सहमति जताई

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न्यायालय ने यूएई की अदालत के आदेश से जुड़ी याचिका पर जुलाई में सुनवाई पर सहमति जताई

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 04:16 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 04:16 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर जुलाई में सुनवाई करने पर सहमति जताई, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक अदालत की ओर से रास अल खैमाह इंवेस्टमेंट अथॉरिटी के पक्ष में और हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद के खिलाफ पारित 500 करोड़ रुपये के आदेश के क्रियान्वयन से संबंधित है।

भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित की ओर से की गई एक मध्यस्थता प्रक्रिया के विफल रहने का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने यह आदेश दिया।

रास अल खैमाह इंवेस्टमेंट अथॉरिटी (राकिया) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने शुरू में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ को बताया कि मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रही है और अब मामले की सुनवाई न्यायालय खुद जुलाई में करेगा।

प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने 16 मार्च को यूएई की अदालत की ओर से रास अल खैमाह इंवेस्टमेंट अथॉरिटी के पक्ष में और प्रसाद के खिलाफ पारित 500 करोड़ रुपये के धन आदेश के क्रियान्वयन पर विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया था।

पीठ ने सोमवार को कहा कि वह अभी अंतरिम आवेदन पर सुनवाई नहीं करेगी और जुलाई के दूसरे हफ्ते में मुख्य मामले पर दैनिक आधार पर सुनवाई करेगी।

‘राकिया’ 267,941,374 दिरहम (लगभग 543 करोड़ रुपये मूलधन और 643 करोड़ रुपये ब्याज) के लिए यूएई की एक दीवानी अदालत के फैसले को लागू करने का अनुरोध कर रहा है।

यह मामला ‘वैनपिक प्रोजेक्ट’ से जुड़ा हुआ है, जो आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और एक हवाई अड्डा बनाने के लिए 2008 में किया गया संयुक्त उपक्रम था। हालांकि, यह उपक्रम विफल रहा।

‘राकिया’ ने आरोप लगाया है कि प्रसाद ने प्राधिकरण के पूर्व सीईओ खातेर मसाद के साथ मिलकर परियोजना के लिए निर्दिष्ट 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर का गलत इस्तेमाल किया।

प्रसाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने पहले पीठ को बताया था कि उद्योगपति ने पिछले आदेश के मुताबिक जमानत के तौर पर 125 करोड़ रुपये जमा किए थे।

वरिष्ठ वकील ने यह भी कहा कि तेलंगाना में 37 एकड़ जमीन के एक हिस्से का मूल बैनामा भी अदालत में जमा कर दिया गया है।

भाषा वैभव पारुल

पारुल