नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्रियों के बुधवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय चिंतन शिविर में मुख्य रूप से सरकार के कामकाज की समीक्षा की जाएगी तथा भविष्य की योजना बनाने और नये विचारों एवं सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा और इसमें पूरी मंत्रिपरिषद शामिल होगी।
सेवा तीर्थ में ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) स्थित है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पूरी सरकार के कामकाज का जायजा लिया जाएगा तथा भविष्य की योजना, जारी कार्यों की समीक्षा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नये विचारों, सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
‘विकसित भारत’ की कवायद 2021 से चल रही है। ‘विजन 2047’ और इसके लघु अवधि एवं दीर्घ अवधि के रोडमैप को तैयार करने के लिए सचिवों के 10 क्षेत्र-आधारित समूह बनाए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद के लिए हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श भी किया गया। तब से, ‘विकसित भारत 2047’ के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं।
मौजूदा चिंतन शिविर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यह सचिवों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के समूहों द्वारा किए जा रहे काम को एक मंच पर लाता है, जिनमें सुधार, जीवन को आसान बनाना, नियमों के पालन को सहज करना और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताएं शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि यह कोई अलग चिंतन शिविर नहीं है, क्योंकि 23 और 24 सितंबर को होने वाली बातचीत के दो दौर के बाद, आने वाले दिनों में और भी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
चिंतन शिविर में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के कार्यान्वयन, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और जन-सेवाएं प्रदान करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
कार्यक्रमों (योजनाओं) का तय समय-सीमा में कार्यान्वयन करने और प्रशासन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए लगभग छह समूह बनाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में आठ मंत्री शामिल हैं।
ये समूह पहले ही कई बैठकें कर चुके हैं, जिनमें चिंतन बैठक में दी जाने वाली प्रस्तुतियों पर चर्चा की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ाने के लिए उनके मंत्रालयों द्वारा अपनाई गई नीतियों और उपायों पर प्रस्तुतियां देने की संभावना है।
प्रधानमंत्री, विभिन्न सुधारों पर जोर देते रहे हैं और उन्होंने पहले भी अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से कहा था कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना सरकार का मुख्य ध्येय होना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में होने वाली चर्चाओं में इन मुद्दों को उठाये जाने की उम्मीद है।
मंत्रियों की प्रस्तुतियों में नीति-निर्माण की प्रक्रिया को अधिक असरदार और प्रभावकारी बनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
इसी तरह की कवायद 21 अक्टूबर 2021 को भी की गई थी। उस समय चर्चा का मुख्य विषय शासन और नीति निर्माण था तथा इस कवायद का उद्देश्य मंत्रियों को सरकार के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है।
इसे शासन का जायजा लेने, मंत्रालयों के बीच तालमेल बेहतर बनाने और सरकार का भविष्य का एजेंडा तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है।
इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइट को अधिक से अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर काम करने के लिए कहा था।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश