असल मुद्दा महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है: सोनिया गांधी

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असल मुद्दा महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है: सोनिया गांधी

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 08:58 AM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 08:58 AM IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को जोर देकर कहा कि इस सप्ताह संसद के विशेष सत्र में विधेयक लाने के सरकार के कदम को लेकर असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन है।

गांधी ने दावा किया कि यह ‘‘परिसीमन प्रस्ताव अत्यंत खतरनाक’’ है और ‘‘संविधान पर भी हमला’’ है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा में सीटों की संख्या में वृद्धि करने वाले किसी भी परिसीमन को केवल गणितीय रूप से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होना चाहिए।

उन्होंने ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक लेख में यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की असल मंशा जाति आधारित जनगणना को और ‘‘टालने तथा उसे पटरी से उतारने’’ की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पारित कराना चाहती है, जबकि उस समय तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस जल्दबाजी की केवल एक ही वजह हो सकती है और वह है राजनीतिक लाभ लेना तथा विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डालना।’’

गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह पूरा सच नहीं बता रहे।

उन्होंने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ सर्वसम्मति से पारित किया था और इस कानून के तहत संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि यह अगली जनगणना और जनगणना आधारित परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होना था।

उन्होंने कहा, ‘‘यह शर्त विपक्ष ने नहीं रखी थी बल्कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तो पुरजोर तरीके से मांग की थी कि आरक्षण का यह प्रावधान 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए। सरकार ने अपने कारणों से इस पर सहमति नहीं जताई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब हमें यह बताया जा रहा है कि महिलाओं के आरक्षण को 2029 से ही लागू करने के लिए अनुच्छेद 334-ए में संशोधन किया जाएगा। प्रधानमंत्री को अपना फैसला बदलने में 30 महीने क्यों लग गए और वह विशेष सत्र बुलाने के लिए कुछ सप्ताह इंतजार क्यों नहीं कर सकते?’’

भाषा सिम्मी शोभना

शोभना