नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को 24 घंटे राजनीति में सक्रिय रहने वाला नेता माना जाता है, लेकिन एक चीज ऐसी है, जो आज भी उनके अंदर के लड़कपन को जगा देती है और वह है उनकी ‘येज्डी रोडकिंग’ मोटरसाइकिल की सवारी।
शिवकुमार और इस पुराने दौर की मशहूर मोटरसाइकिल के बीच के इस लगाव का जिक्र रशीद किदवई की नयी किताब “डी के शिवकुमार – कांग्रेस क्राइसिस मैनेजर, कर्नाटक्स किंगमेकर” में किया गया है।
हैचेट इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब के अनुसार, 1980 के आसपास जब शिवकुमार कॉलेज के छात्र थे, तब वह जोश से भरे, सक्रिय और नेतृत्व क्षमता वाले युवा थे। अपने दोस्तों और साथी छात्रों के बीच वह लोगों को संगठित करने के लिए जाने जाते थे।
किताब में बताया गया है कि वह कॉलेज के अंदर और बाहर आसानी से लोगों को एकजुट कर लेते थे और स्वाभाविक नेतृत्व के साथ उनका मार्गदर्शन करते थे। यही गुण आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में और मजबूत हुआ।
कॉलेज छात्रसंघ चुनावों में भागीदारी ने उनकी राजनीतिक समझ को और बेहतर बनाया।
किताब के अनुसार, ‘‘उन दिनों वह सीईए 7684 नंबर वाली येज्डी रोडकिंग मोटरसाइकिल चलाते थे। यह मोटरसाइकिल उनकी युवावस्था और आकर्षक व्यक्तित्व की पहचान बन गई थी। इसी मोटरसाइकिल से वह छात्रावासों, चुनाव प्रचार स्थलों और कॉलेज परिसर आते-जाते थे।’
किताब में कहा गया है कि पढ़ाई पूरी करने से पहले ही शिवकुमार को कांग्रेस का टिकट मिल गया, उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा, 1989 में विधायक बने और जल्द ही मंत्री भी बन गए।
पुस्तक के अनुसार, जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, इस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कम होता गया और शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित घर के एक कोने में पड़ी-पड़ी जंग खाने लगी।
किताब में बताया गया है कि एक दिन शिवकुमार के करीबी दोस्त श्याम ने इस मोटरसाइकिल को देखा, पुरानी यादें ताजा होने पर उन्होंने शिवकुमार के करीबी राजशेखर से कहा कि वह इस मोटरसाइकिल को फिर से पहले जैसा बनाना चाहते हैं।
पुस्तक के अनुसार, राजशेखर ने सहमति दी और पुरानी रोडकिंग को वहां से ले जाया गया।
पुस्तक में बताया गया है कि श्याम ने यह काम अपने परिवार के एक मित्र के बेटे सुप्रीत नाइक को सौंपा, जिन्हें पुरानी मोटरसाइकिलों का बहुत शौक था, लेकिन मोटरसाइकिल को पहले जैसा बनाना आसान नहीं था, इसके लिए चेन्नई, मैसूर, मुंबई और यहां तक कि वियतनाम से भी पुर्जे मंगाने पड़े।
पुस्तक के अनुसार, छह महीने तक ब्यातरायणपुरा और कत्रिगुप्पे के कुशल मिस्त्री लगातार मेहनत करते रहे, धीरे-धीरे रोडकिंग फिर से पहले जैसी बन गई।
किताब में कहा गया है कि इसका इंजन फिर से अपनी पुरानी ‘डुगु-डुगु-डुगु’ आवाज के साथ चलने लगा और मोटरसाइकिल वैसी ही चमकने लगी जैसी शिवकुमार अपने छात्र जीवन में चलाते थे।
पुस्तक में कहा गया है कि तीन जून 2024 को जब शिवकुमार एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जेपी नगर पहुंचे, तब उन्हें पता नहीं था कि उन्हें क्या सरप्राइज दिया जाने वाला है।
किताब में कहा गया है कि श्याम और सुप्रीत उन्हें बाहर लेकर गए, जहां पार्किंग में उनकी पूरी तरह से तैयार की गई येज्डी रोडकिंग चमक रही थी।
किताब के अनुसार, ‘शिवकुमार की आंखें चमक उठीं। उन्होंने मोटरसाइकिल के चारों ओर घूमकर उसे प्यार से छुआ और किक मारकर स्टार्ट किया। इंजन की आवाज सुनते ही वह मुस्कुराए, हल्का एक्सीलेटर दिया, तस्वीरें खिंचवाईं और कहा कि मोटरसाइकिल को उनके घर भेज दिया जाए।’
दो महीने बाद, एक सितंबर 2024 को यह मोटरसाइकिल उनके सदाशिवनगर स्थित घर पर उन्हें औपचारिक रूप से सौंप दी गई।
पुस्तक में कहा गया है कि श्याम ने उन्हें दो तस्वीरें भी भेंट कीं, जिनमें से एक तस्वीर उनकी युवावस्था की थी, जिसमें वह इसी मोटरसाइकिल पर बैठे थे, और दूसरी तस्वीर नयी तैयार की गई मोटरसाइकिल के साथ खींची गई उनकी तस्वीर थी।
किताब में बताया गया है कि शिवकुमार ने फिर से मोटरसाइकिल स्टार्ट की, इस बार उनके चेहरे पर बच्चों जैसी खुशी थी, जिसे मीडिया ने कैमरों में कैद किया।
महिंद्रा समूह के मालिक आनंद महिंद्रा ने भी सोशल मीडिया पर इस पहल की सराहना की।
इसके बाद शिवकुमार ने अपने इंटीरियर डिजाइनर को निर्देश दिया कि घर के डाइनिंग हॉल में मोटरसाइकिल को परिवार की धरोहर की तरह प्रदर्शित करने के लिए एक खास जगह बनाई जाए।
यह मोटरसाइकिल एक और खास मौके की गवाह बनी।
उन्नीस अगस्त 2025 को यह रोडकिंग हेब्बल जंक्शन पर बने नए फ्लाईओवर की रैंप पर खड़ी थी, उस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उस समय के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को इस फ्लाईओवर का उद्घाटन करना था।
किताब में लिखा है, ‘फीता काटने के बाद, शिवकुमार अपनी 40 साल पुरानी मोटरसाइकिल पर बैठे। उन्होंने अपनी युवावस्था वाला पुराना खादी का पहनावा पहन रखा था और उसी मोटरसाइकिल से फ्लाईओवर पार किया।’
किताब के अनुसार, ‘इंजन की जोशीली आवाज पूरे रास्ते गूंजती रही। सिद्धरमैया मोटरसाइकिल की शानदार हालत और उपमुख्यमंत्री के चेहरे की खुशी देखकर हैरान रह गए।’
किताब में कहा गया है कि यह इस बात की याद दिलाता है कि कोई व्यक्ति चाहे राजनीति, सत्ता और सार्वजनिक जीवन में कितना भी आगे क्यों न पहुंच जाए, पुरानी यादें उसके अंदर के लड़कपन को फिर से जगा सकती हैं।
रशीद किदवई की इस किताब में शिवकुमार के छात्र नेता से लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने तक के सफर के बारे में बताया गया है।
इसमें यह भी बताया गया है कि कई मौकों पर कांग्रेस के विधायकों को दूसरी पार्टियों में जाने से रोकने में शिवकुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें अगस्त 2017 के राज्यसभा चुनाव का भी जिक्र है, जब अहमद पटेल ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल की थी।
तीन जून को शिवकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धरमैया के साथ लंबे समय से जारी विवाद भी औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश