भोजशाला परिसर संबंधी मप्र उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय
भोजशाला परिसर संबंधी मप्र उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताए जाने संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सोमवार को सहमति जताई।
मुस्लिम अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वकील निजाम पाशा ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई जरूरी है।
प्रधान न्यायाधीश ने अपीलकर्ताओं के वकीलों से याचिकाओं में मौजूद कमियों को दूर करने को कहा और उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द किसी पीठ के सामने सुनवाई के लिए इन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को फैसला सुनाया था कि धार जिले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। अदालत ने इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि केंद्र और एएसआई भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन के बारे में फैसला ले सकते हैं।
हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस इमारत को कमाल मौला मस्जिद कहता है। विवादित परिसर एएसआई के संरक्षण में है।
मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
हिंदू पक्षों ने उच्चतम न्यायालय में ‘कैविएट’ (पूर्व सूचना याचिका) दायर की है जिसमें कहा गया है कि भोजशाला परिसर विवाद मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर उनकी बात सुने बिना कोई आदेश जारी नहीं किया जाए।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश

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