अहमदाबाद, 16 जुलाई (भाषा) गुजरात के अहमदाबाद में बृहस्पतिवार को जगन्नाथ रथ यात्रा के सरसपुर के ‘पोल’ या स्थानीय इलाकों में पहुंचने के बाद, हजारों श्रद्धालुओं और धर्मगुरुओं के लिए पारंपरिक भोज का आयोजन किया गया। सरसपुर को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का ननिहाल माना जाता है।
अखाड़ों और झांकियों में शामिल लोगों के साथ-साथ हजारों श्रद्धालु लिम्बडा पोल, कड़ियावाड, गांधी नी पोल, लुहार शेरी, वणियावाड, वासन शेरी, ठाकोरवास, पंचवाड और अम्बलीवाड जैसे इलाकों में पहुंचे, जहां रहने वाले लोगों ने जाति-धर्म का भेदभाव किए बिना सभी को खाना खिलाने की सदियों पुरानी परंपरा को जिंदा रखा।
आयोजक लक्ष्मणदासजी महाराज ने कहा, ‘‘मोटा वासन नी शेरी में 100 से ज्यादा वर्ष से लगभग 5,000 भक्तों और संतों के लिए भोज का आयोजन किया जाता रहा है। सरसपुर को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का ननिहाल माना जाता है। हर साल, यहां के निवासी बड़े उत्साह और गर्मजोशी से देवी-देवताओं का स्वागत करते हैं।’’
पंचवाड पोल के निवासियों ने बताया कि यह परंपरा चार पीढ़ियों से चली आ रही है।
आयोजक प्रकाश जोटानी ने कहा, ‘‘पोल के लोग पिछले चार-पांच दिनों से खाना तैयार कर रहे हैं। लगभग 500 किलो बूंदी, 200 किलो आलू की सब्जी और 200 किलो गेहूं के आटे से बनी पूरियां तैयार की गई हैं। इस भोज में 2,500 से ज्यादा श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।’’
आयोजक प्रवीण पटेल ने बताया कि लुहार शेरी के निवासी पिछले 49 वर्षों से सामुदायिक भोज का आयोजन कर रहे हैं और यहां 15,000 से ज्यादा श्रद्धालुओं को दोपहर का भोजन परोसा जाता है।
उन्होंने बताया कि खाना बनाने में लगभग 200 निवासियों ने हिस्सा लिया, इसके लिए 1,000 किलो आलू की सब्जी, पूरियां और 1,500 किलो मोहनथाल की जरूरत पड़ी।
आयोजक नित्यानंद महाराज ने बताया कि अम्बलीवाड में 15,000-16,000 श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जा रहा था, जहां 81 सालों से यह परंपरा निभाई जा रही है।
सामुदायिक रसोई के अलावा, सरसपुर के निवासियों और स्थानीय समूहों ने रथ यात्रा के रास्ते पर भक्तों के लिए पानी, छाछ और जूस की व्यवस्था की है। जब कड़ी सुरक्षा के बीच रथ यात्रा सरसपुर पहुंची, तो भक्त शोभायात्रा की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर जमा हुए। इस जुलूस में 18 सजे-धजे हाथी, झांकियों वाले लगभग 100 ट्रक, करीब 30 अखाड़े, 20 भजन मंडलियां और साथ ही देवी-देवताओं के तीन रथ शामिल थे।
हजारों श्रद्धालुओं के भक्तिपूर्ण जयकारों के बीच रथ सरसपुर पहुंचे। तंग गलियों में खड़े निवासियों ने फूलों की वर्षा की, जिससे माहौल जीवंत और भक्तिमय हो गया।
भाषा शफीक माधव
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